मिर्धाचक विद्यालय में नवदुर्गा की झांकी, छात्राओं ने दिया नारी सशक्तिकरण का संदेश
प्राथमिक विद्यालय मिर्धाचक आदिवासी टोला में दुर्गापूजा पर छात्राओं ने नवदुर्गा की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में दहेज प्रथा, बाल विवाह, घरेलू हिंसा और नशाखोरी के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया।

मिर्धाचक आदिवासी टोला के विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, दहेज प्रथा, बाल विवाह और नशाखोरी के उन्मूलन का आह्वान
सन्हौला/भागलपुर। दुर्गापूजा के अवसर पर प्राथमिक विद्यालय मिर्धाचक आदिवासी टोला में शुक्रवार को छात्राओं ने नवदुर्गा की आकर्षक झांकी प्रस्तुत कर नारी सशक्तिकरण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का प्रेरक संदेश दिया। प्रधान शिक्षक अर्जुन केशरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने विद्यालय परिसर को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में सजी छात्राओं ने नृत्य और झांकी के माध्यम से शक्ति, साहस, शिक्षा, ज्ञान, आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में महिलाओं की भूमिका, अधिकारों और सम्मान के महत्व को भी रेखांकित किया।
नवदुर्गा के स्वरूपों में छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुति
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान ब्यूटी, रेशमी, प्रियंका, लाखो, रबीना, गुंजा सहित अन्य छात्राओं ने नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का अभिनय किया। आकर्षक वेशभूषा और मनमोहक नृत्य के माध्यम से छात्राओं ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रस्तुति के जरिए शिक्षा, शक्ति, साहस, आत्मरक्षा, कला, चेतना, ज्ञान, परिवर्तन, वैभव, त्याग, करुणा और आत्मसम्मान जैसे महत्वपूर्ण मूल्यों को सामने रखा गया। छात्राओं ने यह संदेश दिया कि नारी केवल शक्ति और भक्ति का प्रतीक ही नहीं, बल्कि समाज के निर्माण और बदलाव की भी महत्वपूर्ण आधारशिला है।
दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ संदेश
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूकता फैलाना रहा। छात्राओं की प्रस्तुति के माध्यम से दहेज प्रथा, बाल विवाह, जातिवाद, घरेलू हिंसा, अंधविश्वास और नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए लोगों को जागरूक बनने का संदेश दिया गया। इस दौरान यह विचार सामने रखा गया कि शिक्षित समाज ही महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों से प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है।
प्रधान शिक्षक बोले—बच्चों में विकसित होती है सामाजिक चेतना
प्रधान शिक्षक अर्जुन केशरी ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक चेतना से भी जोड़ते हैं। ऐसे आयोजन बच्चों को समानता, सम्मान और मानवीय मूल्यों की समझ देते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि बच्चे अपनी प्रतिभा को पहचान सकें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझ सकें। नवदुर्गा की झांकी के माध्यम से बच्चों और समाज को नारी सशक्तिकरण तथा सकारात्मक सामाजिक बदलाव का प्रेरक संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन विशिष्ट शिक्षक इन्द्रजीत पासवान ने किया। इस अवसर पर शिक्षक रंजीत कुमार के साथ दर्जनों अभिभावक और विद्यालय के सभी बच्चे उपस्थित रहे।
आस्था के साथ सामाजिक बदलाव की पहल
प्राथमिक विद्यालय मिर्धाचक आदिवासी टोला में आयोजित यह कार्यक्रम दुर्गापूजा के उत्सवी माहौल में शिक्षा, महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता का संदेश देने वाला आयोजन बना। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह प्रेरणा दी कि समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बच्चों को जागरूक बनाने और उन्हें समानता एवं सम्मान के संस्कार देने से होती है।
✍️ रिपोर्टर: रूपेश कुमार राज / सन्हौला
कमेंट करें