Saturday, 17 October 2026
आपके क्षेत्र की खबर, आपकी आवाज़
BREAKING NEWS
बसंतराय में लगातार लूट और चोरी की घटनाओं से दहशत, आखिर अपराधियों में पुलिस का डर क्यों नहीं?बसंतराय में लगातार लूट और चोरी की घटनाओं से दहशत, आखिर अपराधियों में पुलिस का डर क्यों नहीं?गोड्डा में चोरी के मामले का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार; दो बाइक बरामदयोगी आदित्यनाथ ने लोहिया के भगवान राम, कृष्ण और शिव के बारे में लिखे लेख पर क्या कहाकॉकरोच जनता पार्टी के बड़े चेहरे गिरफ़्तार, अब आंदोलन में आगे क्या होगा?दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च के दौरान CRPF महिला जवान से बदसलूकी का आरोप, थप्पड़ मारने का वीडियो वायरलबाढ़ में सड़क हादसे में बाल-बाल बचे लोजपा (आर) जिलाध्यक्ष सुबोध पासवान, वाहन क्षतिग्रस्तमिर्धाचक विद्यालय में नवदुर्गा की झांकी, छात्राओं ने दिया नारी सशक्तिकरण का संदेश

गारंटी देने वाला नेतृत्व: गुजरात से केंद्र तक, 25 साल का जनसेवा सफर, कैसे बदला Modi का शासन मॉडल?

LIVE अपडेट
शेयर करें:FacebookWhatsAppXGoogle NewsGoogle Preferences
विज्ञापन
अवतार न्यूज़ संवाददाता

 ​नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में लंबे समय तक बड़े-बड़े वादों और आकर्षक नारों की राजनीति देखने को मिली। योजनाएं और घोषणाएं होती रहीं, लेकिन उनके वास्तविक क्रियान्वयन और आम लोगों तक लाभ पहुंचने के बीच की दूरी एक बड़ी चुनौती बनी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर में शासन की एक ऐसी कार्यशैली पर जोर दिखाई देता है, जिसमें घोषणा के साथ लक्ष्य, समयसीमा, क्रियान्वयन और परिणाम को महत्व दिया गया।

इसी कार्यशैली से आगे चलकर ‘मोदी की गारंटी’ की राजनीतिक अवधारणा जुड़ी। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री पद तक के सफर में बिजली, गरीब कल्याण, कृषि, शिक्षा, शिकायत निवारण, स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कई योजनाओं और अभियानों को आगे बढ़ाया गया।

तिरंगा यात्रा निकालकर ‘आप’ ने मोदी सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन, केजरीवाल बोले- क्या तिरंगा लहराना जुर्म है?
तिरंगा यात्रा निकालकर ‘आप’ ने मोदी सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन, केजरीवाल बोले- क्या तिरंगा लहराना जुर्म है?

गुजरात से शुरू हुआ शासन मॉडल

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ज्योतिग्राम योजना ग्रामीण बिजली आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में एक प्रमुख पहल रही। कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था के माध्यम से गांवों में अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। लगभग 1,000 दिनों में इस योजना को व्यापक स्तर पर लागू करने का लक्ष्य रखा गया।

गरीब कल्याण मेले

गरीब और वंचित परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के लिए गरीब कल्याण मेले आयोजित किए गए। इनका उद्देश्य सरकारी सहायता और स्वरोजगार से जुड़ी सुविधाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना और बिचौलियों की भूमिका को कम करना था।

लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले अभिजीत दीपके ने क्या कहा?

कृषि महोत्सव

किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, मिट्टी परीक्षण और उन्नत खेती से जोड़ने के लिए कृषि महोत्सव की शुरुआत की गई। इसके साथ पशु स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से पशुधन के उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी जोर दिया गया।

कन्या केलवणी और शाला प्रवेशोत्सव

बेटियों की शिक्षा और स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए कन्या केलवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव जैसे अभियान चलाए गए। इन अभियानों में सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज की भागीदारी के माध्यम से शिक्षा को व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया।

बिहार में खुलेंगे 100 फ्रेश कैच कियोस्क, सुधा की तर्ज पर बिकेंगी ताजी मछलियां; सरकार देगी 80% तक सहायता
बिहार में खुलेंगे 100 फ्रेश कैच कियोस्क, सुधा की तर्ज पर बिकेंगी ताजी मछलियां; सरकार देगी 80% तक सहायता

SWAGAT से शिकायतों का सीधा समाधान

अप्रैल 2003 में शुरू हुआ SWAGAT कार्यक्रम तकनीक के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की व्यवस्था के रूप में सामने आया। इसका उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। वर्ष 2010 में इस पहल को संयुक्त राष्ट्र के पब्लिक सर्विस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

गुजरात से दिल्ली तक पहुंचा मॉडल

गुजरात में शासन के इन प्रयोगों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर भी लक्ष्य आधारित योजनाओं को आगे बढ़ाया गया। बिजली से वंचित गांवों तक बिजली पहुंचाने से लेकर स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार तक कई बड़े कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर लागू किए गए।

15 अगस्त 2014 को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता और वित्तीय समावेशन को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बड़े पैमाने पर शौचालय निर्माण हुआ और 2019 तक ग्रामीण स्वच्छता कवरेज को आधिकारिक रूप से 100 प्रतिशत घोषित किया गया।

इसी अवधि में प्रधानमंत्री जन-धन योजना के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। आधार, मोबाइल और डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विस्तार ने सरकारी सेवाओं और डिजिटल लेन-देन को भी नई दिशा दी।

राष्ट्रीय एकता और आंतरिक सुरक्षा

5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 से जुड़े विशेष प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने को भी मोदी सरकार के बड़े राजनीतिक और संवैधानिक फैसलों में गिना जाता है।

वहीं, वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए सुरक्षा, विकास और प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करने की नीति पर जोर दिया गया। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य भी इसी दृष्टिकोण का हिस्सा रहा।

क्या है ‘मोदी की गारंटी’ का शासन मॉडल?

मोदी की राजनीतिक कार्यशैली को समझने के लिए इसके पीछे दिखाई देने वाले चार प्रमुख तत्वों को देखा जा सकता है—लक्ष्य तय करना, समयसीमा निर्धारित करना, क्रियान्वयन पर निगरानी और परिणाम के प्रति जवाबदेही।

गुजरात में बिजली, गरीब कल्याण, कृषि, शिक्षा और शिकायत निवारण से शुरू हुआ यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता, वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तीकरण, राष्ट्रीय एकता और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों तक पहुंचा।

यही वह कार्यशैली है जिसे राजनीतिक भाषा में ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में प्रस्तुत किया गया—यानी केवल घोषणा नहीं, बल्कि संकल्प को परिणाम तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता।

शेयर करें:FacebookWhatsAppXGoogle NewsGoogle Preferences

कमेंट करें

अपना कमेंट लिखें

आपका ईमेल सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।