Monday, 26 October 2026
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भाग्यश्री के मंदिर में आरती करने से पटवर्धन परिवार में विवाद, पिता ने आदित्यराजे को बताया एकमात्र उत्तराधिकारी

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अवतार न्यूज़ संवाददाता
गणपति मंदिर में आरती के बाद भाग्यश्री पटवर्धन और सांगली राजपरिवार का उत्तराधिकार विवाद चर्चा में।

मुंबई/सांगली: बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी फिल्म या अभिनय नहीं, बल्कि उनका पारिवारिक और राजघराने से जुड़ा मामला है। महाराष्ट्र के सांगली के पटवर्धन राजपरिवार के ऐतिहासिक गणपति पंचायतन मंदिर में गणेश चतुर्थी के दौरान भाग्यश्री द्वारा आरती किए जाने के बाद परिवार के भीतर उत्तराधिकार और परंपरागत अधिकार को लेकर विवाद सामने आया है।

भाग्यश्री, जिनका पूरा नाम भाग्यश्री पटवर्धन दसानी है, सांगली के पटवर्धन परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह विजयसिंहराजे पटवर्धन की तीन बेटियों में सबसे बड़ी हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर उन्होंने परिवार से जुड़े ऐतिहासिक गणपति मंदिर में आरती की। इसके बाद उनके पिता ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जताई और कहा कि मंदिर में इस पारंपरिक पूजा का अधिकार उनके दत्तक पुत्र युवराज आदित्यराजे पटवर्धन के पास है।

आखिर मंदिर में आरती को लेकर क्यों हुआ विवाद?

सांगली का गणपति पंचायतन मंदिर पटवर्धन परिवार की धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, परिवार में इस मंदिर की पारंपरिक पूजा और आरती से जुड़े अधिकार को उत्तराधिकार की व्यवस्था से जोड़ा जाता रहा है।

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गणेश चतुर्थी के दौरान भाग्यश्री के आरती करने के बाद यह मामला सार्वजनिक हो गया। उनके पिता विजयसिंहराजे पटवर्धन ने कहा कि उनके दत्तक पुत्र आदित्यराजे ही सांगली की गद्दी के उत्तराधिकारी हैं और इसी कारण मंदिर की परंपरागत जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।

पिता ने आदित्यराजे को बताया एकमात्र वारिस

विजयसिंहराजे पटवर्धन ने मीडिया के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए आदित्यराजे पटवर्धन को अपना एकमात्र उत्तराधिकारी बताया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि सांगली की गद्दी के उत्तराधिकारी के तौर पर आदित्यराजे को ही मंदिर की पारंपरिक आरती करने का अधिकार है।

इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठने लगा कि आखिर भाग्यश्री, जो परिवार की बड़ी बेटी हैं, उनकी भूमिका क्या है और सांगली राजपरिवार की उत्तराधिकार व्यवस्था में उन्हें कौन-से अधिकार हासिल हैं?

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भाग्यश्री ने क्या कहा?

वहीं भाग्यश्री की ओर से सामने आया पक्ष अलग है। उन्होंने परिवार की परंपराओं को बनाए रखने में परिवार के सदस्यों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि परंपराओं को आगे बढ़ाना परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है।

रिपोर्टों के अनुसार भाग्यश्री ने यह भी बताया कि उनके पिता की तबीयत ठीक नहीं थी और इसी वजह से उन्होंने आगे बढ़कर परंपरा निभाने का फैसला किया।

यानी एक तरफ पिता का कहना है कि पूजा और आरती की जिम्मेदारी उत्तराधिकारी आदित्यराजे की है, जबकि भाग्यश्री की तरफ से परिवार की परंपरा में परिवार के सदस्यों की भागीदारी पर जोर दिया गया।

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क्या भाग्यश्री को सच में कर दिया गया बेदखल?

सोशल मीडिया और कुछ सुर्खियों में इस मामले को भाग्यश्री को पिता द्वारा “बेदखल” किए जाने के तौर पर पेश किया जा रहा है। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में कानूनी रूप से भाग्यश्री को पूरी संपत्ति से बेदखल किए जाने का कोई स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आया है।

मौजूदा विवाद मुख्य रूप से सांगली की पारंपरिक गद्दी, गणपति मंदिर में आरती के अधिकार और परिवार की उत्तराधिकार व्यवस्था को लेकर बताया गया है। इसलिए इसे सीधे तौर पर संपत्ति से बेदखली कहना सावधानी के बिना सही नहीं होगा।

किसे मिला उत्तराधिकार?

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक विजयसिंहराजे पटवर्धन ने अपने दत्तक पुत्र युवराज आदित्यराजे पटवर्धन को सांगली की गद्दी का एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित किया है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि आदित्यराजे परिवार में दत्तक पुत्र हैं और उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया गया है।

इसलिए फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर उत्तराधिकार का दावा आदित्यराजे पटवर्धन के पक्ष में बताया गया है, न कि भाग्यश्री के।

2013 से 2016 के बीच भाग्यश्री ने संभाला था सांगली एस्टेट का काम

इस विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू भाग्यश्री और उनके पिता के बीच पहले से चले आ रहे मतभेद हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार 2013 से 2016 के बीच भाग्यश्री और उनके पति हिमालय दसानी ने सांगली एस्टेट से जुड़े कामकाज में भूमिका निभाई थी। बाद में आर्थिक और जमीन से जुड़े विवादों के बीच उनके अधिकार वापस लिए जाने की बात रिपोर्टों में सामने आई है।

यही पुराना पारिवारिक विवाद अब गणपति मंदिर की आरती के मामले के साथ फिर चर्चा में आ गया है।

बेटियों के अधिकार और राजपरंपरा पर भी बहस

इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सामाजिक सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या पारंपरिक राजघरानों में उत्तराधिकार केवल पुरुष सदस्य को ही मिलना चाहिए?

कुछ रिपोर्टों में सांगली संस्थान की परंपराओं और उत्तराधिकार संबंधी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गद्दी के लिए पुरुष उत्तराधिकारी की व्यवस्था रही है। इसी संदर्भ में आदित्यराजे को उत्तराधिकारी बताया जा रहा है।

हालांकि आधुनिक भारत में किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत और संपत्ति संबंधी अधिकारों का सवाल अलग कानूनी ढांचे के तहत देखा जाता है। इसलिए राजपरंपरा, मंदिर की धार्मिक जिम्मेदारी और निजी संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकार—इन तीनों को एक ही चीज मानना उचित नहीं होगा।

बॉलीवुड से लेकर राजघराने तक चर्चा में भाग्यश्री

भाग्यश्री को देशभर में सलमान खान के साथ आई फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से बड़ी पहचान मिली थी। वह सांगली के पटवर्धन परिवार से आती हैं और उनके पिता विजय सिंह पटवर्धन सांगली के पूर्व शाही परिवार के प्रमुख के रूप में जाने जाते हैं।

अब गणेश चतुर्थी के दौरान मंदिर में आरती करने की घटना ने उनके पारिवारिक संबंधों और सांगली की पुरानी राजपरंपराओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

भाग्यश्री के मंदिर में आरती करने के बाद शुरू हुआ विवाद केवल एक पूजा को लेकर नहीं है, बल्कि इसके पीछे उत्तराधिकार, पारिवारिक परंपरा और सांगली राजघराने में धार्मिक जिम्मेदारियों का सवाल जुड़ा हुआ है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विजयसिंहराजे पटवर्धन ने अपने दत्तक पुत्र युवराज आदित्यराजे पटवर्धन को सांगली की गद्दी का एकमात्र उत्तराधिकारी बताया है। दूसरी ओर, भाग्यश्री परिवार की परंपराओं में परिवार के सदस्यों की भागीदारी को महत्वपूर्ण मानती हैं। इस विवाद के आगे की स्थिति परिवार के अगले सार्वजनिक कदमों और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया होती है, उस पर निर्भर करेगी।

 

✍️ रिपोर्टर: मो. आसिफ इकबाल
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