हालांकि, वास्तविक चयन केवल रैंक के आधार पर नहीं होता। अधिकारी का सैन्य रिकॉर्ड, पेशेवर प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता और चयन प्रक्रिया में प्रदर्शन जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। राष्ट्रपति के ADC के लिए कोई आम नागरिक सीधे आवेदन नहीं करता, बल्कि चयन Defence Services में से किया जाता है।
राष्ट्रपति के पास कितने Commissioned Officer ADC होते हैं?
राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक नियमावली के अनुसार AsDC (Commissioned Officers) के कुल पांच पद हैं।
- भारतीय सेना — 3 अधिकारी
- भारतीय नौसेना — 1 अधिकारी
- भारतीय वायुसेना — 1 अधिकारी
इन पदों पर नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अधिकारियों का चयन Defence Services से किया जाता है। आधिकारिक अधिसूचना में Army के लिए Captain, Navy के लिए Lieutenant और Air Force के लिए Flight Lieutenant को संबंधित योग्यता के रूप में बताया गया है।
एक नजर में
| सेवा |
राष्ट्रपति के Commissioned Officer ADC |
आधिकारिक रैंक |
| भारतीय सेना |
3 |
Captain |
| भारतीय नौसेना |
1 |
Lieutenant |
| भारतीय वायुसेना |
1 |
Flight Lieutenant |
इससे साफ है कि “राष्ट्रपति का ADC बनने के लिए Major होना ही जरूरी है” कहना सही नहीं है।
फिर Major अधिकारियों का नाम क्यों सामने आता है?
हाल के वर्षों में राष्ट्रपति के ADC पद पर Major रैंक के अधिकारी भी नजर आए हैं। सितंबर 2026 में Major Navya Shekhawat राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ADC नियुक्त होने वाली पहली महिला Army officer बनीं। वह इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं; उनसे पहले 2025 में भारतीय नौसेना की Lieutenant Commander Yashasvi Solanki राष्ट्रपति की ADC बनी थीं।
इसलिए किसी ADC का Major होना यह साबित नहीं करता कि Major ही इस पद की अनिवार्य न्यूनतम रैंक है। आधिकारिक राष्ट्रपति भवन अधिसूचना में Army Commissioned Officer ADC के लिए Captain को योग्यता के रूप में दर्ज किया गया है।
Captain, Major और Lieutenant Colonel में क्या फर्क है?
Captain: ADC पद के लिए आधिकारिक रूप से निर्दिष्ट रैंक
राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना में भारतीय सेना के Commissioned Officer ADC के लिए Captain रैंक का उल्लेख है। यानी इस पद की आधिकारिक पात्रता को केवल Major तक सीमित नहीं किया गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर Captain अपने आप राष्ट्रपति का ADC बन सकता है। नियुक्ति Defence Services से चयन के जरिए होती है।
Major: व्यवहार में नजर आने वाली रैंक
Major भारतीय सेना में Captain से वरिष्ठ रैंक है। हाल में Major Navya Shekhawat की राष्ट्रपति ADC के रूप में नियुक्ति के बाद इस पद और Major रैंक को लेकर चर्चा और बढ़ी है। लेकिन उनकी नियुक्ति को देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि Major होना कानूनी या आधिकारिक न्यूनतम शर्त है।
Lieutenant Colonel: वरिष्ठ अधिकारी, लेकिन ADC नियम को अलग से समझना जरूरी
Lieutenant Colonel Major से वरिष्ठ रैंक है। राष्ट्रपति के ADC पद और राष्ट्रपति भवन के अन्य सैन्य पदों को एक-दूसरे से अलग समझना जरूरी है।
मसलन, Deputy Military Secretary to the President एक अलग पद है। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार इस पद के लिए Colonel या equivalent अधिकारी की योग्यता निर्धारित है।
यानी ADC और Deputy Military Secretary को एक ही पद या एक ही रैंक की नियुक्ति समझना सही नहीं होगा।
राष्ट्रपति के ADC का काम क्या होता है?
ADC राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों और सैन्य प्रोटोकॉल से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रपति के विभिन्न औपचारिक कार्यक्रमों, समारोहों और महत्वपूर्ण engagements में ADC की मौजूदगी दिखाई देती है।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार ADC की जिम्मेदारियों में कार्यक्रमों के दौरान सहायता, सैन्य प्रोटोकॉल से जुड़े समन्वय और राष्ट्रपति के आधिकारिक engagements में सहयोग शामिल है।
यह सिर्फ किसी समारोह में राष्ट्रपति के साथ चलने वाला पद नहीं है। अधिकारी को अनुशासन, समयबद्धता, संचार, प्रोटोकॉल और अत्यधिक पेशेवर व्यवहार की जरूरत होती है।
क्या राष्ट्रपति के ADC बनने के लिए कोई अलग परीक्षा होती है?
नहीं।
राष्ट्रपति के ADC पद के लिए आम युवाओं के लिए कोई अलग “ADC परीक्षा” या खुली भर्ती नहीं होती। उम्मीदवार को पहले भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में Commissioned Officer के रूप में सेवा में होना पड़ता है।
इसके बाद चयन Defence Services के भीतर से किया जाता है। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक अधिसूचना में भी Commissioned Officer ADC के लिए recruitment method “On selection from Defence Services” दिया गया है।
यानी रास्ता मोटे तौर पर इस तरह समझा जा सकता है:
Defence Services में Officer Entry → Commissioned Service → पेशेवर/सेवा रिकॉर्ड → चयन प्रक्रिया → राष्ट्रपति के ADC के रूप में नियुक्ति
चयन में किन बातों की भूमिका होती है?
ADC की आंतरिक चयन प्रक्रिया के सभी विस्तृत मानदंड सार्वजनिक नहीं किए जाते। इसलिए सोशल मीडिया या अलग-अलग रिपोर्टों में बताए गए हर कथित “कटऑफ” या अनिवार्य शर्त को आधिकारिक नियम मानना उचित नहीं होगा।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में ADC नियुक्तियों को सैन्य सेवा में प्रदर्शन, नेतृत्व, अनुशासन और पेशेवर क्षमता से जोड़कर बताया गया है। राष्ट्रपति के ADC की नियुक्ति Defence Services से चयन के माध्यम से होती है।
ADC का कार्यकाल कितना होता है?
Army Regulations में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के ADC के लिए दो वर्ष का कार्यकाल बताया गया है, जिसे विशेष परिस्थितियों में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
इसलिए ADC की नियुक्ति किसी अधिकारी की स्थायी नई नौकरी या स्थायी अलग कैडर नहीं होती। यह सैन्य सेवा के दौरान मिलने वाली एक विशेष नियुक्ति होती है।
राष्ट्रपति के ADC और Honorary ADC में भी अंतर है
यहां एक और महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
Commissioned Officer ADC और Honorary Aide-de-Camp एक ही चीज नहीं हैं।
राष्ट्रपति के लिए Honorary ADC की नियुक्तियों के अलग नियम हैं। Army Regulations में राष्ट्रपति के Honorary Aide-de-Camp के लिए अलग प्रावधान दिया गया है। इसलिए किसी अधिकारी की honorary appointment को सामान्य Commissioned Officer ADC की पात्रता से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
क्यों खास है राष्ट्रपति का ADC पद?
भारत के राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। ऐसे में राष्ट्रपति के सैन्य स्टाफ का हिस्सा बनना किसी भी serving officer के करियर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है।
हाल के वर्षों में इस पद पर महिलाओं की नियुक्ति ने भी इसे चर्चा में ला दिया है। 2025 में Lieutenant Commander Yashasvi Solanki राष्ट्रपति की पहली महिला ADC बनीं और 2026 में Major Navya Shekhawat पहली महिला Army officer के रूप में इस पद पर पहुंचीं।
तथ्य बॉक्स: राष्ट्रपति के ADC से जुड़ी जरूरी बातें
पद: Aide-de-Camp to the President
कुल Commissioned Officer ADC: 5
Army से: 3
Navy से: 1
Air Force से: 1
Army की आधिकारिक पात्रता: Captain
चयन का तरीका: Defence Services से चयन
क्या आम नागरिक सीधे आवेदन कर सकता है? नहीं
क्या Major होना अनिवार्य है? नहीं
ADC का कार्यकाल: Army Regulations के अनुसार सामान्यतः 2 वर्ष, विशेष मामलों में 1 वर्ष विस्तार का प्रावधान
पूरी तस्वीर
राष्ट्रपति के ADC पद को लेकर सबसे बड़ा भ्रम Major रैंक को लेकर है। हाल के कुछ चर्चित ADC अधिकारी Major रैंक के रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक अधिसूचना बताती है कि Army के Commissioned Officer ADC पद के लिए Captain रैंक निर्दिष्ट है।
इसलिए राष्ट्रपति का ADC बनने की कहानी केवल Captain बनाम Major की नहीं है। असल बात यह है कि अधिकारी Defence Services में सेवा कर रहा हो और निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए इस विशेष नियुक्ति के लिए चुना जाए। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक नियमों में Army, Navy और Air Force—तीनों से ADC पदों की व्यवस्था स्पष्ट रूप से दी गई है।
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