यह दर्दनाक घटना बसंतराय प्रखंड क्षेत्र के राहा पंचायत अंतर्गत गोरगामा गांव की है। मृतक की पहचान भारत मंडल के पुत्र सोनी कुमार के रूप में हुई है, जिनकी उम्र करीब 18 वर्ष बताई जा रही है। बताया जाता है कि शनिवार को सोनी कुमार अपने दो साथियों रूपेश कुमार और विक्रम कुमार के साथ हनवारा थाना क्षेत्र के गोरगामा गांव के सामने गेरुआ नदी में स्नान करने गए थे। तीनों युवक नदी में नहा रहे थे। इसी दौरान सोनी कुमार अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। साथ में मौजूद दोनों युवकों ने उन्हें बचाने का काफी…
गेरुआ नदी में डूबे 18 वर्षीय सोनी कुमार का शव बरामद, कल हुआ था हादसा | बसंतराय
प्रयास किया, लेकिन पानी की गहराई और तेज बहाव के कारण वे सफल नहीं हो सके। देखते ही देखते सोनी कुमार नदी में डूब गए। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। परिजन भी मौके पर पहुंचे और अपने बेटे की तलाश में जुट गए। ग्रामीणों ने अपने स्तर से नदी में खोजबीन शुरू की। बताया जाता है कि जिस स्थान पर युवक डूबा था, वहां से लेकर हनवारा पुल तक ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर तैरते हुए तलाश की। लेकिन काफी प्रयास के बाद भी सोनी कुमार का कोई पता नहीं चल सका। परिजनों के लिए यह समय कितना मुश्किल रहा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ बेटे के डूबने का दुख था, तो दूसरी तरफ यह उम्मीद भी थी कि शायद वह कहीं मिल जाए। परिवार और ग्रामीण लगातार नदी की ओर टकटकी लगाए हुए थे। रविवार सुबह, यानी घटना के अगले दिन, नवरतनपुर पुल के समीप गेरुआ नदी में एक शव तैरता हुआ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक व्यक्ति शौच के लिए नदी किनारे गया था। इसी दौरान उसकी नजर नदी में तैरते शव पर पड़ी। उसने किसी तरह शव को पकड़कर नदी से बाहर निकाला और इसकी सूचना ग्रामीणों एवं परिजनों को दी। सूचना मिलते ही इलाके के हजारों लोग और मृतक के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। जैसे ही परिवार ने शव की पहचान की, वहां चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे की कल से तलाश की जा रही थी, आज उसका शव सामने था। सोनी कुमार की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर किसी की आंखें नम हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आक्रोश भी देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों में डूबने की घटनाओं के दौरान तत्काल बचाव के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान लाइफ जैकेट की व्यवस्था नहीं थी और तत्काल एनडीआरएफ की टीम भी उपलब्ध नहीं हो सकी। लोगों का कहना है कि यदि बचाव टीम को आने में समय लगता है, तो थाना और प्रखंड स्तर पर पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट, रस्सी और अन्य बचाव उपकरण उपलब्ध रहने चाहिए, ताकि स्थानीय गोताखोर और ग्रामीण सुरक्षित तरीके से तलाश कर सकें। ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि गेरुआ नदी में हर वर्ष पानी बढ़ने के समय जागरूकता अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि जब भी नदी में पानी आता है, तब डूबने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पहले से ही लोगों को गहरे पानी में जाने से रोकने, खतरे वाले स्थानों पर चेतावनी लगाने और बचाव व्यवस्था तैयार रखने की जरूरत है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब हर साल जलस्रोतों में डूबने की घटनाएं सामने आती हैं, तो प्रशासन पानी बढ़ने के बाद ही क्यों जागता है? क्या पहले से जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा सकता? क्या स्थानीय स्तर पर बचाव के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं कराए जा सकते? आज सोनी कुमार इस दुनिया में नहीं हैं। एक परिवार का बेटा हमेशा के लिए चला गया। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जलस्रोतों में होने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा। फिलहाल, इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए थाना एवं प्रखंड स्तर पर त्वरित बचाव व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गेरुआ नदी में कल डूबे 18 वर्षीय सोनी कुमार का शव आज बरामद हो गया। लेकिन परिवार के लिए यह सिर्फ एक शव की बरामदगी नहीं, बल्कि उनके घर की खुशियों का हमेशा के लिए खत्म हो जाना है।
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