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Uttarakhand News: बामणी गांव में ग्रामीणों के बीच पहुंचे CM धामी, महिलाओं के साथ किया छाछनी नृत्य

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अवतार न्यूज़ संवाददाता

बदरीनाथ पहुंचे CM धामी, बामणी गांव में महिलाओं संग किया पारंपरिक छाछनी नृत्य; लोक संस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को बदरीनाथ धाम पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए और बामणी गांव में स्थानीय महिलाओं के साथ पारंपरिक छाछनी नृत्य में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को राज्य की विशिष्ट पहचान बताते हुए इनके संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

देहरादून/बदरीनाथ, 20 सितंबर 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को चमोली जिले के बदरीनाथ धाम पहुंचे। धार्मिक यात्रा के साथ उनका यह दौरा स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहा। बदरीनाथ के समीप स्थित बामणी गांव पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। इसी दौरान पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं को लोकगीतों पर छाछनी नृत्य करते देखकर मुख्यमंत्री भी उनके बीच पहुंचे और नृत्य में शामिल हुए।

बामणी गांव में दिखा देवभूमि की लोक संस्कृति का रंग

बामणी गांव में मुख्यमंत्री धामी के पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। गांव में महिलाएं पारंपरिक गीतों और नृत्य के माध्यम से स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रही थीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को करीब से देखा और फिर महिलाओं के साथ छाछनी नृत्य में सहभागी बने।

रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के माध्यम से मां नंदा देवी का स्मरण भी किया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय महिलाओं द्वारा प्रस्तुत लोकगीत और लोकनृत्य की सराहना की तथा उनके प्रति आभार जताया।

यह दृश्य इसलिए भी खास रहा क्योंकि बदरीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल के आसपास की लोक परंपराएं यहां के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री का स्थानीय ग्रामीणों के साथ सीधे सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होना इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा।

मां नंदा देवी मंदिर में की पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री धामी ने बामणी गांव में स्थित मां नंदा देवी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बामणी गांव की यात्रा का उल्लेख करते हुए स्थानीय लोगों से हुई मुलाकात और मातृशक्ति से मिले स्नेह को साझा किया। उन्होंने लोक संस्कृति के रंग में शामिल होने को अपने लिए विशेष अनुभव बताया।

लोक संस्कृति को बताया उत्तराखंड की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएं, लोकगीत, लोकनृत्य और रीति-रिवाज राज्य की विशिष्ट पहचान हैं। उन्होंने इनके संरक्षण और संवर्धन को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल के दौरान भी मुख्यमंत्री ने इसी विषय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा में राज्य को अपनी संस्कृति और जड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। लोक भाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों और पर्वों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।

नई पीढ़ी तक पहुंचे पहाड़ों की विरासत

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्थानीय इतिहास, धार्मिक आस्था और सामाजिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

बदरीनाथ क्षेत्र में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 की थीम भी “हमारी विरासत, हमारा भविष्य” रखी गई थी। 19 और 20 सितंबर को आयोजित इस महोत्सव में लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और ग्रामीण संस्कृति को प्रमुखता दी गई।

देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में भी शामिल हुए CM धामी

मुख्यमंत्री धामी ने बदरीनाथ में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के समापन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। यह आयोजन भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन की ओर से ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित किया गया था।

महोत्सव में स्थानीय कलाकारों, युवाओं, ग्रामीणों, महिलाओं और अन्य प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता और उपविजेता प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।

बदरीनाथ धाम में पूजा और यात्रा व्यवस्थाओं का भी जायजा

बामणी गांव जाने से पहले मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ धाम में भगवान बदरी विशाल के दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा के दूसरे चरण को लेकर व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा का पहला चरण ऐतिहासिक रहा और करीब 51 लाख श्रद्धालु एवं तीर्थयात्री दर्शन कर चुके थे। मानसून के बाद यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो चुका है और श्रद्धालुओं की सुगम तथा सुरक्षित यात्रा के लिए व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं से भी मिले

बदरीनाथ प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय निवासियों और वहां पहुंचे श्रद्धालुओं से बातचीत की। एक स्थानीय दुकान पर रुककर उन्होंने दूध और जलेबी का स्वाद भी लिया। इसके अलावा उन्होंने बदरीनाथ में आयोजित श्री बदरीनाथ कथा महोत्सव में भी भाग लिया।

विकास के साथ संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश

मुख्यमंत्री के बदरीनाथ दौरे में धार्मिक आस्था, स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय विकास—तीनों पहलू दिखाई दिए। एक तरफ उन्होंने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए, वहीं दूसरी तरफ गांव में पहुंचकर स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया।

देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड में विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखना जरूरी है।

अब नजर इस पर

बदरीनाथ और आसपास के सीमांत क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए स्थानीय कलाकारों, महिलाओं, कारीगरों और युवाओं को मंच मिलने की संभावना भी बढ़ती है।

बामणी गांव में महिलाओं के साथ मुख्यमंत्री धामी का छाछनी नृत्य इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की एक झलक के रूप में सामने आया। कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं आज भी गांवों के सामाजिक जीवन में जीवंत हैं और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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Md Asif Equbal
लेखक के बारे में

Md Asif Equbal

Md Asif Equbal, Avatar News के पत्रकार और लेखक हैं। झारखंड, बिहार और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनहित से जुड़े समाचारों पर उनकी रिपोर्ट पढ़ें।

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