अदाणी पावर के अनुसार, परियोजना को चरणबद्ध तरीके से चालू करने की योजना है और पहली इकाइयों का कमीशनिंग चरण दिसंबर 2030 से शुरू होने की उम्मीद है।
₹48,000 करोड़ का निवेश, रोजगार के भी बड़े अवसर
इस परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक निर्माण के दौरान 20,000 तक रोजगार पैदा हो सकते हैं, जबकि प्लांट के संचालन में आने के बाद करीब 5,000 रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।
इतने बड़े निवेश से निर्माण, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, स्थानीय कारोबार और इससे जुड़ी सेवाओं में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। खास तौर पर धुबरी जैसे इलाके में बड़े औद्योगिक निवेश से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
असम की बिजली क्षमता बढ़ाने की कोशिश
असम लंबे समय से अपनी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। चापर का यह प्रोजेक्ट राज्य के भीतर बिजली उत्पादन को बढ़ाने की योजना का हिस्सा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह परियोजना अदाणी समूह के असम में प्रस्तावित लगभग ₹63,000 करोड़ के पावर सेक्टर निवेश का हिस्सा है। समूह की अलग-अलग क्षेत्रों में कुल निवेश योजनाओं को जोड़ने पर राज्य में निवेश का आंकड़ा इससे भी अधिक बताया गया है।
चार यूनिट में होगा बिजली उत्पादन
चापर परियोजना में 800 MW की चार उत्पादन इकाइयां प्रस्तावित हैं। इस तरह सभी यूनिट पूरी क्षमता से चलने के बाद कुल उत्पादन क्षमता 3,200 MW होगी।
इतनी क्षमता वाला प्लांट असम के बिजली उत्पादन ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के पूरा होने के बाद इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन परिसंपत्तियों में शामिल किए जाने की उम्मीद है।
परियोजना को मिली थी प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए मंजूरी
इस परियोजना की प्रक्रिया अचानक शुरू नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक अदाणी पावर ने अक्टूबर 2025 में प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए 3,200 MW परियोजना के लिए सफल बोली लगाई थी। इसके बाद नवंबर 2025 में कंपनी को असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी APDCL की ओर से लेटर ऑफ अवॉर्ड मिला था।
परियोजना को DBFOO—Design, Build, Finance, Own and Operate मॉडल के तहत विकसित किए जाने की जानकारी सामने आई है। यानी परियोजना के डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन में कंपनी की प्रमुख भूमिका होगी।
बिजली की पूरी क्षमता के लिए लंबी अवधि की व्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, अदाणी पावर को APDCL की ओर से इस परियोजना की पूरी 3,200 MW क्षमता के लिए दीर्घकालिक पावर सप्लाई अवॉर्ड भी मिला है। परियोजना के लिए कोयले की व्यवस्था केंद्र सरकार की SHAKTI नीति के तहत मिले कोयला लिंक से किए जाने की बात भी सामने आई है।
इसका उद्देश्य राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यावसायिक और औद्योगिक जरूरतों के लिए बिजली उत्पादन क्षमता को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
आधारशिला कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस परियोजना को असम के ऊर्जा क्षेत्र और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने राज्य में बड़े निवेश आने और बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ने को औद्योगिक विकास से जोड़कर देखा।
NDTV को दिए एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के कारण बिजली की औसत लागत में कमी आने की उम्मीद है और इसे असम ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की बड़ी बिजली परियोजनाओं में बताया।
धुबरी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
धुबरी में इतने बड़े स्तर का औद्योगिक निवेश स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकता है। प्लांट के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों और तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी। इसके साथ परिवहन, निर्माण सामग्री, होटल, खानपान, लॉजिस्टिक्स और अन्य स्थानीय सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।
परियोजना के संचालन के बाद स्थायी रोजगार के अलावा सहायक कारोबार और सप्लाई चेन से जुड़े अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
एक नजर में पूरी परियोजना
| जानकारी |
विवरण |
| परियोजना |
अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट |
| स्थान |
चापर, धुबरी, असम |
| कंपनी |
अदाणी पावर लिमिटेड |
| कुल क्षमता |
3,200 MW |
| यूनिट |
800 MW की 4 यूनिट |
| निवेश |
करीब ₹48,000 करोड़ |
| निर्माण रोजगार |
20,000 तक |
| संचालन के बाद रोजगार |
करीब 5,000 |
| कमीशनिंग |
चरणबद्ध, दिसंबर 2030 से प्रस्तावित |
| पावर सेक्टर निवेश |
असम में करीब ₹63,000 करोड़ का व्यापक निवेश |
असम के पावर सेक्टर के लिए अगला चरण
चापर परियोजना की आधारशिला रखे जाने के बाद अब इसका अगला महत्वपूर्ण चरण जमीन पर निर्माण गतिविधियों का विस्तार और निर्धारित समयसीमा के अनुसार अलग-अलग यूनिट को तैयार करना होगा। दिसंबर 2030 से चरणबद्ध कमीशनिंग की योजना के चलते आने वाले वर्षों में इस परियोजना की प्रगति पर नजर रहेगी।
अब नजर इस पर: ₹48,000 करोड़ की इस परियोजना के निर्माण की गति, स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव तथा 2030 से प्रस्तावित चरणबद्ध बिजली उत्पादन असम के ऊर्जा क्षेत्र की अगली बड़ी तस्वीर तय करेंगे।
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