इंग्लैंड सीरीज से पहले क्या हुआ था?
BCCI ने 21 जून 2026 को इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया था। टीम में रोहित शर्मा को शामिल किया गया था, जबकि शुभमन गिल को कप्तान बनाया गया था। विराट कोहली भी टीम का हिस्सा थे।
लेकिन पर्दे के पीछे रोहित के भविष्य को लेकर चर्चा चल रही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति, टीम मैनेजमेंट और BCCI के कुछ प्रमुख निर्णयकर्ताओं के बीच यह विचार बना था कि लॉर्ड्स में होने वाले तीसरे वनडे के बाद रोहित शर्मा के ODI करियर को लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि चयन समिति की ओर से यह संदेश रोहित तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को दी गई थी। प्रज्ञान ओझा को रोहित का करीबी माना जाता है।
रोहित शर्मा इस फैसले से खुश नहीं थे?
रिपोर्ट के अनुसार, रोहित शर्मा 2027 वनडे विश्व कप में खेलना चाहते थे और कथित तौर पर उन्हें यह संदेश पसंद नहीं आया। इसके बाद उन्होंने एक प्रभावशाली BCCI पदाधिकारी से अपनी नाराजगी जाहिर की।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रोहित की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई ऐसा विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है, जिसमें उन्होंने इन दावों की पुष्टि की हो।
इसी वजह से इस मामले को फिलहाल रिपोर्टेड घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
फिर BCCI ने रोहित के पक्ष में बयान क्यों दिया?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे के बाद रोहित के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुईं।
उस समय BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने सार्वजनिक रूप से कहा कि लॉर्ड्स का तीसरा वनडे रोहित शर्मा का आखिरी मैच नहीं होगा और रोहित भारतीय ODI टीम का हिस्सा बने रहेंगे, जब तक वह टीम की योजनाओं में हैं।
यही वह घटनाक्रम था, जिसे PTI की रिपोर्ट के हवाले से India Today और NDTV ने अगरकर की नाराजगी से जोड़कर बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगरकर को कथित तौर पर इस सार्वजनिक बयान की जानकारी पहले से नहीं थी। इससे उन्हें लगा कि बड़े खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े फैसलों में चयन समिति की भूमिका को दरकिनार किया जा रहा है।
रोहित बनाम यशस्वी का सवाल भी जुड़ा था
इस पूरे विवाद में सिर्फ रोहित शर्मा का भविष्य ही मुद्दा नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, अगरकर की सोच यह थी कि अगर भारत को 2027 विश्व कप के लिए यशस्वी जायसवाल जैसे युवा विकल्प को तैयार करना है, तो उसे पर्याप्त ODI मैचों में खेलने का मौका मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, रोहित जैसे अनुभवी बल्लेबाज को लेकर तत्काल फैसला करने के बजाय कुछ समय देने की बात भी सामने आई।
यही अंतर चयन समिति और BCCI के निर्णय लेने के तरीके के बीच मतभेद का हिस्सा बताया गया है।
जुलाई में रोहित ने फिर बदल दिया माहौल
दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड दौरे पर रोहित को लेकर उठे सवालों के बाद उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से जवाब दिया।
दूसरे वनडे में संघर्ष करने के बाद भी BCCI ने उनके भविष्य को लेकर सार्वजनिक तौर पर उन्हें समर्थन दिया। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ कहा था कि लॉर्ड्स का मैच रोहित का आखिरी ODI नहीं होगा।
इसके बाद रोहित ने भी ODI क्रिकेट में अपनी उपयोगिता बनाए रखी।
सितंबर की एक रिपोर्ट में Mint ने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ जुलाई में शतक लगाने के बाद रोहित की भारतीय ODI टीम में जगह को लेकर तत्काल कोई खतरा नहीं बताया गया था।
अगरकर और BCCI के बीच सिर्फ रोहित ही मुद्दा नहीं था
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अगरकर और BCCI के बीच मतभेद केवल रोहित शर्मा तक सीमित नहीं थे।
VVS लक्ष्मण और अगरकर के बीच भी खिलाड़ी प्रबंधन, चोटिल खिलाड़ियों की जानकारी और India A के कार्यक्रम को लेकर मतभेद बताए गए हैं। India Today और NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मुद्दों ने धीरे-धीरे आपसी भरोसे को प्रभावित किया।
India A के कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठे। कुछ मुकाबलों की तारीखें घरेलू टूर्नामेंट और अंतरराष्ट्रीय सीरीज से टकरा रही थीं, जिससे खिलाड़ियों के प्रबंधन और उपलब्धता को लेकर चर्चा हुई।
अगरकर की मीटिंग से दूरी बनी बड़ा मोड़
रिपोर्ट के मुताबिक, घटनाक्रम का एक बड़ा मोड़ उस समय आया जब BCCI की अहम समीक्षा बैठक में अगरकर शामिल नहीं हुए।
बैठक में इंग्लैंड सीरीज के प्रदर्शन और आगे की रणनीति पर चर्चा होनी थी। BCCI के कुछ लोगों ने उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया, जबकि BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने सार्वजनिक रूप से अगरकर का बचाव किया था।
इसके बाद अगरकर और BCCI के रिश्तों में बढ़ी दूरी को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
क्या रोहित 2027 विश्व कप खेलेंगे?
यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि रोहित शर्मा की ODI टीम में जगह को लेकर BCCI ने जुलाई 2026 में सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया था। वहीं, 2027 विश्व कप में उनकी भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला भविष्य के प्रदर्शन, टीम की रणनीति और चयन संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा।
अक्टूबर 2025 में अगरकर ने भी रोहित और विराट कोहली के ODI भविष्य पर कहा था कि दोनों फिलहाल इसी प्रारूप में खेल रहे हैं और विश्व कप 2027 के बारे में तत्काल निष्कर्ष निकालने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों से अपेक्षा रन बनाने की है।
अब नजर किस पर?
अजीत अगरकर-BCCI विवाद में रोहित शर्मा का नाम इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यह मामला केवल एक खिलाड़ी के चयन का नहीं, बल्कि अनुभव बनाम भविष्य की टीम तैयार करने की रणनीति से जुड़ा दिखाई देता है।
एक तरफ 2027 विश्व कप को ध्यान में रखकर युवा खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके देने का सवाल है, तो दूसरी तरफ रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी की उपलब्धता और प्रदर्शन का मुद्दा है।
हालांकि, अगरकर और BCCI के बीच मतभेदों के कारणों को लेकर सामने आई जानकारी मुख्य रूप से मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित है। BCCI की ओर से इस पूरे घटनाक्रम का विस्तृत आधिकारिक संस्करण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय क्रिकेट में 2027 विश्व कप की योजना बनाते समय रोहित शर्मा की भूमिका क्या तय होती है और चयन प्रक्रिया में चयन समिति तथा BCCI के बीच जिम्मेदारियों का संतुलन किस तरह रखा जाता है।
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