यह मामला उस समय सामने आया था जब केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआती तौर पर पुणे के लोहागढ़ किले से गिरने का हादसा माना जा रहा था। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने इसे कथित तौर पर सुनियोजित हत्या बताया। अब दाखिल की गई चार्जशीट में पुलिस ने कथित साजिश और उससे जुड़े डिजिटल ट्रेल का विस्तृत विवरण दिया है।
महत्वपूर्ण: नीचे बताए गए तथ्य पुलिस की जांच और चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में ट्रायल के बाद होगा।
5,053 पन्नों की चार्जशीट में क्या-क्या शामिल?
पुणे ग्रामीण पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य शामिल किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें मोबाइल फोन डेटा, WhatsApp चैट, तस्वीरें, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तकनीकी विश्लेषण रिपोर्ट और गवाहों के बयान शामिल हैं।
पुलिस ने इस मामले में करीब 80 से 85 गवाहों के बयान दर्ज किए होने की जानकारी दी है। वहीं अन्य रिपोर्टों में 100 से अधिक गवाहों का भी उल्लेख किया गया है। इस अंतर की वजह अलग-अलग रिपोर्टों में गवाहों की अलग गणना हो सकती है।
CCTV फुटेज ने बदली जांच की दिशा
केतन की मौत के बाद शुरुआती तस्वीर एक दुर्घटना जैसी सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक केतन लोहागढ़ किले पर गया था और बाद में करीब 400 फीट गहरी खाई में गिरा मिला।
लेकिन जांच के दौरान किले के टिकट काउंटर के पास लगे CCTV फुटेज ने पुलिस का ध्यान एक अन्य व्यक्ति की ओर खींचा। फुटेज में एक हुडी पहने व्यक्ति केतन और सिया के पीछे जाता दिखाई दिया। पुलिस ने बाद में उसकी पहचान चेतन चौधरी के रूप में की।
यही CCTV फुटेज पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बना। चार्जशीट के अनुसार, चेतन ने किले तक पहुंचने के लिए अलग रास्ते का इस्तेमाल किया था।
चेतन ने फोन क्यों अलग रखा? जांच में डिजिटल ट्रेल पर फोकस
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन चेतन ने अपना मोबाइल फोन अपने कार्यस्थल पर छोड़ दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि उसके फोन की इंटरनेट सेवाएं सुबह करीब 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक बंद थीं।
पुलिस ने इसके साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण भी किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक सिया और चेतन के बीच हजारों कॉल की जानकारी मिली, जिनमें कई लंबी बातचीत भी शामिल थीं। पुलिस ने इन कॉल रिकॉर्ड्स को कथित साजिश की जांच में अहम डिजिटल साक्ष्य के तौर पर देखा।
फर्जी ‘माही’ Instagram अकाउंट से केतन को लोहागढ़ बुलाने का आरोप
चार्जशीट का एक अहम हिस्सा कथित फर्जी Instagram अकाउंट ‘माही’ से जुड़ा है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने ‘माही’ नाम से एक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाया था। इसके लिए कथित तौर पर ऐसी लड़की की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया जिसे आरोपी जानते थे।
पुलिस का आरोप है कि इस अकाउंट से केतन को ऐसा विश्वास दिलाया गया कि ‘माही’ सिया की दोस्त है। इसके बाद उसे सिया के साथ लोहागढ़ जाने और वहां सरप्राइज बर्थडे सेलिब्रेशन करने के लिए प्रेरित किया गया।
जांच के मुताबिक, हत्या के बाद यह फर्जी Instagram अकाउंट डिलीट कर दिया गया।
लोहागढ़ ही क्यों चुना गया?
पुलिस की चार्जशीट में लोहागढ़ को चुने जाने के पीछे कथित तौर पर पहले हुई एक मौत का भी उल्लेख है।
रिपोर्ट के मुताबिक मई के अंत में सिया और चेतन ने लोनावला क्षेत्र के कई स्थानों की कथित रेकी की थी। इनमें टाइगर पॉइंट सहित अन्य पहाड़ी इलाके शामिल थे। पुलिस के अनुसार उन्होंने ऐसे स्थान की तलाश की जहां निगरानी कम हो।
चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों ने लोहागढ़ को इसलिए चुना क्योंकि मार्च 2025 में वहां एक 21 वर्षीय महिला की गिरने से मौत हुई थी। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों को लगा कि केतन की मौत को भी इसी तरह दुर्घटना या सेल्फी लेते समय गिरने की घटना के रूप में दिखाया जा सकता है।
14 जून को भी कथित तौर पर हुआ था प्रयास
पुलिस के अनुसार, 18 जून की घटना से पहले भी केतन को लोहागढ़ ले जाया गया था।
चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि 14 जून को सिया और केतन लोहागढ़ पहुंचे थे। पुलिस का दावा है कि सिया ने कथित तौर पर केतन को खाई की ओर धक्का देने की कोशिश की, लेकिन वह गिरने से बच गया।
इसके बाद कथित तौर पर सांप होने का बहाना बनाकर उसे किनारे की तरफ ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन यह योजना भी सफल नहीं हुई।
Bali जाने की तैयारी के बीच बिगड़ा पूरा प्लान
पुलिस की जांच के अनुसार, केतन और सिया के प्री-वेडिंग शूट के लिए बाली जाने की योजना थी। चार्जशीट में दावा किया गया है कि सिया ने 4 जून को लोहागढ़ जाने पर जोर दिया था।
इसके बाद 6 जून को खालापुर के एक कैफे में केतन का पासपोर्ट फाड़कर फेंकने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक इसके कारण बाली जाने की योजना प्रभावित हुई।
हत्या से पहले इंटरनेट पर क्या खोजा गया?
चार्जशीट में कथित ऑनलाइन सर्च हिस्ट्री का भी उल्लेख है।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने दावा किया कि सिया ने 2025 में लोहागढ़ में हुई एक समान घटना से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन खोजी थी। इसके अलावा पुलिस ने जांच में राजा रघुवंशी हत्याकांड से संबंधित ऑनलाइन सर्च का भी उल्लेख किया है।
अन्य रिपोर्टों में आरोपियों द्वारा क्राइम फिल्मों और मर्डर पॉडकास्ट के जरिए हत्या के मामलों का अध्ययन किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पुलिस से बचने के तरीकों पर भी कथित तौर पर जानकारी जुटाई थी।
18 जून को क्या हुआ? पुलिस की चार्जशीट में यह दावा
पुलिस के मुताबिक 18 जून को चेतन अलग रास्ते से लोहागढ़ पहुंचा और एक मंदिर की तरफ चला गया। कथित तौर पर सिया के संकेत के बाद वह वापस घटनास्थल की ओर आया।
चार्जशीट में पुलिस ने आरोप लगाया है कि जब केतन का ध्यान दूसरी तरफ था, तब सिया ने पीछे से उसके कंधे की तरफ धक्का दिया और चेतन ने पैर की ओर से धक्का दिया। पुलिस के मुताबिक इसके बाद चेतन ने कथित तौर पर केतन को लात मारी, जिसके बाद वह खाई में गिर गया।
यह घटनाक्रम फिलहाल पुलिस का आरोप है और अदालत में इसकी न्यायिक जांच होना बाकी है।
तीन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी चार्जशीट में
India Today की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने लगभग 80-85 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें तीन ऐसे लोग भी शामिल बताए गए हैं जिन्होंने कथित तौर पर अपराध होते देखा था।
वहीं Hindustan Times की रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी के हवाले से 100 से अधिक गवाहों और पांच प्रत्यक्षदर्शियों का उल्लेख किया गया है। इसलिए गवाहों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है।
डिजिटल सबूतों की पूरी कड़ी क्या बताती है?
पुलिस की जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्यों को मोटे तौर पर इन हिस्सों में देखा जा सकता है—
- CCTV फुटेज: टिकट काउंटर के पास कथित तौर पर चेतन की मौजूदगी और गतिविधियों की जांच।
- मोबाइल डेटा: आरोपियों के फोन और उससे जुड़े तकनीकी डेटा की जांच।
- CDR: सिया और चेतन के बीच कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण।
- WhatsApp चैट: कथित बातचीत और संपर्कों की जांच।
- Instagram: ‘माही’ नाम के कथित फर्जी अकाउंट की भूमिका।
- सर्च हिस्ट्री: लोहागढ़ की पिछली घटना और अन्य चर्चित हत्या मामलों से संबंधित कथित ऑनलाइन सर्च।
- फॉरेंसिक/तकनीकी रिपोर्ट: डिजिटल साक्ष्यों के तकनीकी परीक्षण से जुड़े दस्तावेज।
- फोटो और अन्य दस्तावेज: जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री।
तीनों आरोपी जेल में
इस मामले में पुलिस ने सिया गोयल, चेतन चौधरी और रितेश संजय हंगे को आरोपी बनाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार तीनों फिलहाल हिरासत/जेल में हैं। पुलिस ने पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा कथित रूप से अपनी भूमिका स्वीकार किए जाने का भी दावा किया है, हालांकि अदालत में स्वीकारोक्ति और अन्य साक्ष्यों का कानूनी मूल्य न्यायिक प्रक्रिया में तय होगा।
अब नजर अदालत की अगली कार्रवाई पर
5,053 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में है। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, चैट और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी जांच की कहानी अदालत के सामने रखी है।
लेकिन चार्जशीट में लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। आगे ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता और बचाव पक्ष की दलीलें यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि अभियोजन की कहानी कानूनी रूप से किस हद तक स्थापित होती है।
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