Monday, 26 October 2026
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झारखंड: कैबिनेट में फिर फेरबदल की चर्चा क्यों तेज? 25 सितंबर की बैठक के बाद खुल सकता है पत्तों का राज

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अवतार न्यूज़ संवाददाता

झारखंड: कैबिनेट में फिर फेरबदल की चर्चा क्यों तेज? 25 सितंबर की बैठक के बाद खुल सकता है पत्तों का राज

25 सितंबर की कैबिनेट बैठक के बाद झारखंड मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद

रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में एक बार फिर मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्य में कैबिनेट के कुछ पद खाली हैं और इन्हें भरने को लेकर सत्ता के गलियारों में कई नामों की चर्चा चल रही है। इन चर्चाओं के बीच अब सबसे ज्यादा निगाहें 25 सितंबर को होने वाली मंत्रिपरिषद की बैठक पर टिक गई हैं।

आधिकारिक सूचना के मुताबिक 25 सितंबर को दोपहर 3 बजे रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। बैठक में अलग-अलग विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा और फैसले होने हैं। हालांकि, मंत्रिमंडल फेरबदल को बैठक के आधिकारिक एजेंडे का हिस्सा बताया नहीं गया है।

25 सितंबर की बैठक क्यों बन गई है अहम?

कैबिनेट बैठक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इस बार इसके आसपास राजनीतिक चर्चाएं इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि इसके बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना को लेकर कई रिपोर्टें सामने आई हैं।

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रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि 25 सितंबर की बैठक के बाद 26 सितंबर से मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। हालांकि, यह अभी मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से किसी फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सुदिव्य सोनू के निधन के बाद खाली पद पर भी नजर

कैबिनेट फेरबदल की चर्चा का एक प्रमुख कारण पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद खाली हुआ मंत्री पद भी बताया जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में उनकी पत्नी श्वेता शर्मा के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा सामने आई है। हालांकि, उन्हें मंत्री बनाए जाने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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सुदिव्य सोनू झारखंड सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे। उनके निधन के बाद उनके परिवार को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा शुरू हुई है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे उदाहरण

झारखंड की राजनीति में दिवंगत नेताओं के परिवार के सदस्यों को राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने के उदाहरण पहले भी रहे हैं।

पूर्व शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाया गया था। इसी तरह पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

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इन्हीं उदाहरणों की वजह से श्वेता शर्मा के नाम को लेकर चल रही चर्चा को भी राजनीतिक तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी नाम की चर्चा को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

दूसरे खाली पद के लिए भी कई नाम चर्चा में

मंत्रिमंडल में अन्य रिक्त पदों को लेकर भी झामुमो के कई नेताओं के नाम राजनीतिक चर्चाओं में हैं।

रिपोर्टों में मथुरा महतो, रामसूर्या मुंडा, दशरथ गगराई, बसंत सोरेन और अनंत देव जैसे नामों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से भी एक पद को लेकर दावेदारी की चर्चा बताई गई है।

हालांकि, इन नामों में से किसी को लेकर सरकार या पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि उन्हें मंत्री बनाया जा रहा है।

गठबंधन के समीकरण भी होंगे महत्वपूर्ण

हेमंत सोरेन सरकार में मंत्रिमंडल का स्वरूप केवल व्यक्तिगत दावेदारी से तय नहीं होगा। इसमें गठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सीटों के बंटवारे का समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

ऐसे में यदि फेरबदल होता है तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खाली पद किस दल के हिस्से में जाता है और झामुमो-कांग्रेस के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन किस तरह बनाया जाता है।

क्या 25 सितंबर को ही होगा बड़ा ऐलान?

फिलहाल इसका सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता।

25 सितंबर की बैठक के लिए आधिकारिक सूचना जारी हो चुकी है, लेकिन बैठक के एजेंडे में मंत्रिमंडल फेरबदल की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है। इसलिए यह संभव है कि बैठक में प्रशासनिक और नीतिगत प्रस्तावों पर ही निर्णय हो और कैबिनेट में बदलाव का फैसला बाद में सामने आए।

दूसरी तरफ, कई मीडिया रिपोर्टों में बैठक के बाद यानी 26 सितंबर से आगे फेरबदल की संभावना जताई गई है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में 25 सितंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार के सामने फिलहाल क्या तस्वीर है?

मुद्दा मौजूदा स्थिति
25 सितंबर कैबिनेट बैठक आधिकारिक रूप से तय
बैठक का समय दोपहर 3 बजे
स्थान प्रोजेक्ट भवन, रांची
मंत्रिमंडल फेरबदल अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं
श्वेता शर्मा का नाम राजनीतिक चर्चाओं में
अन्य संभावित नाम कई झामुमो नेताओं के नाम चर्चा में
अंतिम फैसला मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर

क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?

कैबिनेट में रिक्त पद, सुदिव्य सोनू के निधन के बाद बनी स्थिति और गठबंधन के भीतर प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे इस चर्चा की पृष्ठभूमि में हैं। इसके साथ ही 25 सितंबर की निर्धारित कैबिनेट बैठक ने अटकलों को और हवा दी है।

लेकिन मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि चर्चा और आधिकारिक निर्णय में अंतर है। सरकार की ओर से जब तक मंत्रियों के नाम या फेरबदल की अधिसूचना सामने नहीं आती, तब तक संभावित नामों को केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अब नजर इस पर

अब सबकी नजर 25 सितंबर की मंत्रिपरिषद बैठक और उसके बाद होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगी। बैठक में किन प्रस्तावों पर फैसला होता है और क्या इसके बाद मंत्रिमंडल के रिक्त पदों को लेकर कोई औपचारिक संकेत मिलता है—यही आने वाले दिनों में सबसे अहम होगा।

यदि फेरबदल होता है, तो उसके बाद विभागों के बंटवारे और गठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व में होने वाले बदलाव भी महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल श्वेता शर्मा समेत जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें से किसी पर अंतिम मुहर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Md Asif Equbal

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