ये खेल नहीं, जिंदगी की दौड़ थी! साड़ी में नंगे पांव दौड़ी कविता देवी, 1600 मीटर में दिखाया हौसला
रामगढ़ के दुलमी की रहने वाली कविता देवी की संघर्ष की कहानी सामने आई है। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं और रोज सुबह चार बजे उठकर होमगार्ड भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ती हैं। भर्ती के शारीरिक परीक्षण में उन्होंने साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी की। उनके लिए यह सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि अपने बच्चों और परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद है|







रामगढ़ के दुलमी की रहने वाली कविता देवी की कहानी इन दिनों चर्चा में है। पति की मौत के बाद दो बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं और हर दिन सुबह चार बजे उठकर दौड़ की तैयारी करती हैं। होमगार्ड भर्ती के शारीरिक परीक्षण में उन्होंने साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी की।
पति की मौत के बाद बढ़ी परिवार की जिम्मेदारी
झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी की रहने वाली कविता देवी की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। उनके पति गुजरात में मजदूरी करते थे। लंबी बीमारी के बाद पति का निधन हो गया। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी कविता के कंधों पर आ गई। इसके कुछ समय बाद उनके भैसुर का भी निधन हो गया, जिससे परिवार की परिस्थितियां और मुश्किल हो गईं।
आज कविता देवी अपने दो बच्चों के साथ सास-ससुर की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं। आर्थिक परेशानियों के बीच भी उन्होंने अपने भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
सुबह चार बजे शुरू होती है लक्ष्य की तैयारी
कविता की जिंदगी में मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है। बताया जाता है कि वह हर दिन सुबह करीब चार बजे उठकर दौड़ का अभ्यास करती हैं। इसके बाद वह ईंट भट्ठे में काम करने चली जाती हैं।
सुबह-सुबह अपने लक्ष्य के लिए दौड़ना और उसके बाद दिनभर मजदूरी करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। एक तरफ परिवार की जिम्मेदारी है तो दूसरी तरफ नौकरी हासिल कर जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश।
साड़ी और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़
होमगार्ड भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान कविता देवी की तस्वीर सामने आई, जिसमें वह साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ती दिखाई दे रही हैं। उनके पास रनिंग शूज और ट्रैक सूट जैसी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उन्होंने इसे अपने लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
बताया जा रहा है कि कविता ने 1600 मीटर की दौड़ करीब छह मिनट में पूरी की। उनके लिए यह दौड़ सिर्फ भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी, बल्कि अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद भी थी।
जूते नहीं थे, लेकिन हौसला मजबूत था
कविता की कहानी की सबसे खास बात यही है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने तैयारी और मेहनत जारी रखी। जिन परिस्थितियों में वह परिवार चलाने के लिए ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं, उसी के बीच अपने लक्ष्य के लिए समय निकालना उनके संघर्ष को दिखाता है।
कविता के लिए मैदान में दौड़ना किसी खेल प्रतियोगिता में पदक जीतने की कोशिश नहीं थी। उनके सामने अपने बच्चों का भविष्य और परिवार की जिम्मेदारियां थीं। नौकरी मिलने की उम्मीद उनके लिए आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का एक रास्ता है।
हर दौड़ खेल के लिए नहीं होती
कविता देवी की कहानी एक महत्वपूर्ण बात सामने रखती है—मैदान में दौड़ता हुआ हर व्यक्ति खिलाड़ी नहीं होता। कुछ लोग इसलिए दौड़ते हैं क्योंकि उन्हें अपनी जिंदगी बदलनी होती है।
किसी के लिए दौड़ फिटनेस है, किसी के लिए प्रतियोगिता और किसी के लिए करियर का रास्ता। कविता के लिए यह दौड़ अपने परिवार को संभालने और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद से जुड़ी है।
सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करना, फिर ईंट भट्ठे में मजदूरी करना और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना—कविता की यही दिनचर्या उनके संघर्ष की कहानी कहती है।
उनके पास महंगे जूते नहीं थे, सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन लक्ष्य साफ था। इसीलिए कविता की यह दौड़ कुछ मिनटों में पूरी जरूर हुई, लेकिन इसके पीछे वर्षों का संघर्ष और बेहतर जिंदगी की उम्मीद छिपी है।
नोट: कविता देवी के होमगार्ड भर्ती में अंतिम चयन की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने तक इस खबर में चयन का दावा नहीं किया जा रहा है। शारीरिक परीक्षा में उनकी दौड़ और उससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध विवरण के आधार पर दी गई है।
ये खेल नहीं, जिंदगी की दौड़ थी: साड़ी में नंगे पांव दौड़ी कविता देवी, 1600 मीटर में दिखाया हौसला
रामगढ़ के दुलमी की रहने वाली कविता देवी की कहानी इन दिनों चर्चा में है। पति की मौत के बाद दो बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं और हर दिन सुबह चार बजे उठकर दौड़ की तैयारी करती हैं। होमगार्ड भर्ती के शारीरिक परीक्षण में उन्होंने साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी की।
पति की मौत के बाद बढ़ी परिवार की जिम्मेदारी
झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी की रहने वाली कविता देवी की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। उनके पति गुजरात में मजदूरी करते थे। लंबी बीमारी के बाद पति का निधन हो गया। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी कविता के कंधों पर आ गई। इसके कुछ समय बाद उनके भैसुर का भी निधन हो गया, जिससे परिवार की परिस्थितियां और मुश्किल हो गईं।
आज कविता देवी अपने दो बच्चों के साथ सास-ससुर की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं। आर्थिक परेशानियों के बीच भी उन्होंने अपने भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
सुबह चार बजे शुरू होती है लक्ष्य की तैयारी
कविता की जिंदगी में मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है। बताया जाता है कि वह हर दिन सुबह करीब चार बजे उठकर दौड़ का अभ्यास करती हैं। इसके बाद वह ईंट भट्ठे में काम करने चली जाती हैं।
सुबह-सुबह अपने लक्ष्य के लिए दौड़ना और उसके बाद दिनभर मजदूरी करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। एक तरफ परिवार की जिम्मेदारी है तो दूसरी तरफ नौकरी हासिल कर जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश।
साड़ी और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़
होमगार्ड भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान कविता देवी की तस्वीर सामने आई, जिसमें वह साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ती दिखाई दे रही हैं। उनके पास रनिंग शूज और ट्रैक सूट जैसी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उन्होंने इसे अपने लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
बताया जा रहा है कि कविता ने 1600 मीटर की दौड़ करीब छह मिनट में पूरी की। उनके लिए यह दौड़ सिर्फ भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी, बल्कि अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद भी थी।
जूते नहीं थे, लेकिन हौसला मजबूत था
कविता की कहानी की सबसे खास बात यही है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने तैयारी और मेहनत जारी रखी। जिन परिस्थितियों में वह परिवार चलाने के लिए ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं, उसी के बीच अपने लक्ष्य के लिए समय निकालना उनके संघर्ष को दिखाता है।
कविता के लिए मैदान में दौड़ना किसी खेल प्रतियोगिता में पदक जीतने की कोशिश नहीं थी। उनके सामने अपने बच्चों का भविष्य और परिवार की जिम्मेदारियां थीं। नौकरी मिलने की उम्मीद उनके लिए आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का एक रास्ता है।
हर दौड़ खेल के लिए नहीं होती
कविता देवी की कहानी एक महत्वपूर्ण बात सामने रखती है—मैदान में दौड़ता हुआ हर व्यक्ति खिलाड़ी नहीं होता। कुछ लोग इसलिए दौड़ते हैं क्योंकि उन्हें अपनी जिंदगी बदलनी होती है।
किसी के लिए दौड़ फिटनेस है, किसी के लिए प्रतियोगिता और किसी के लिए करियर का रास्ता। कविता के लिए यह दौड़ अपने परिवार को संभालने और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद से जुड़ी है।
सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करना, फिर ईंट भट्ठे में मजदूरी करना और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना—कविता की यही दिनचर्या उनके संघर्ष की कहानी कहती है।
उनके पास महंगे जूते नहीं थे, सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन लक्ष्य साफ था। इसीलिए कविता की यह दौड़ कुछ मिनटों में पूरी जरूर हुई, लेकिन इसके पीछे वर्षों का संघर्ष और बेहतर जिंदगी की उम्मीद छिपी है।
नोट: कविता देवी के होमगार्ड भर्ती में अंतिम चयन की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने तक इस खबर में चयन का दावा नहीं किया जा रहा है। शारीरिक परीक्षा में उनकी दौड़ और उससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध विवरण के आधार पर दी गई है।
कमेंट करें