दिल्ली SIR: केजरीवाल, जयशंकर, आडवाणी समेत बड़े नेताओं को नोटिस, जानिए पूरा विवाद

दिल्ली SIR पर बढ़ी सियासी हलचल, बड़े नेताओं को मिले नोटिस; जानिए क्या है पूरा मामला

दिल्ली SIR के दौरान बड़े नेताओं समेत लाखों मतदाताओं को नोटिसदिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। चुनाव आयोग की ओर से जारी नोटिस पाने वालों में केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, बीजेपी नेता कैलाश गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ नोटिस जारी होने का मतलब मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है।

क्या है दिल्ली में SIR का पूरा मामला?

चुनाव आयोग ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों और विवरणों का सत्यापन करना है, ताकि पात्र मतदाता सूची में बने रहें और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ठीक किया जा सके।

दिल्ली CEO के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार SIR की प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर Enumeration Form उपलब्ध कराना और मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करना शामिल है। आयोग ने यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत शुरू की है।

33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस

दिल्ली में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी प्रविष्टियां मिलीं जिन्हें चुनाव अधिकारियों ने ‘logical discrepancies’ या ‘no mapping’ जैसी श्रेणियों में रखा है। इसके बाद करीब 33.1 लाख मतदाताओं को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

यही संख्या अब राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बन गई है। विपक्षी दल प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि नोटिस सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे सीधे नाम काटे जाने से जोड़ना सही नहीं है।

बड़े नेताओं के नाम भी सूची में क्यों आए?

SIR के दौरान कुछ प्रमुख नेताओं के नाम भी उन मतदाताओं की सूची में आए हैं जिनके रिकॉर्ड में सत्यापन की जरूरत बताई गई है।

इनमें लालकृष्ण आडवाणी, एस जयशंकर, मनीष सिसोदिया, कैलाश गहलोत, अरविंद केजरीवाल और रेखा गुप्ता जैसे नाम शामिल हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक अलग-अलग मामलों में नोटिस के पीछे रिकॉर्ड का पुराने SIR डेटा से मिलान नहीं होना या Enumeration Form में दर्ज विवरण में विसंगति जैसे कारण हो सकते हैं।

लालकृष्ण आडवाणी के मामले में रिपोर्ट के मुताबिक उनका नाम 2002 की दिल्ली SIR मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाया था। उनके परिवार के कुछ सदस्यों के रिकॉर्ड भी नोटिस प्रक्रिया में आए।

अरविंद केजरीवाल और परिवार को भी नोटिस

पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम भी SIR से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं में शामिल है।

रिपोर्टों के अनुसार केजरीवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्यों को नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के एक हिस्से में मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया के तहत नोटिस मिला। इस पर आम आदमी पार्टी की ओर से सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, यहां भी महत्वपूर्ण बात यह है कि नोटिस मिलने और अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बीच कई प्रक्रियात्मक चरण हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में क्या हुआ?

दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी SIR के दौरान सामने आया था। उनके रिकॉर्ड में एक ऐसी विसंगति चिन्हित की गई थी जिसके बाद नोटिस जारी किया गया।

लेकिन चुनाव आयोग के मुताबिक इसके बाद फील्ड वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की जांच की गई और उनकी मतदाता प्रविष्टि को सत्यापित कर दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया में है।

इस घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि SIR में नोटिस मिलने के बाद सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के जरिए मामले का निपटारा किया जा सकता है।

मनीष सिसोदिया के रिकॉर्ड में क्या सामने आया?

पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम भी नोटिस पाने वाले प्रमुख मतदाताओं में है। रिपोर्ट के मुताबिक वह नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं और उनके परिवार के सदस्यों के रिकॉर्ड में भी अलग-अलग तरह की विसंगतियां चिन्हित हुईं।

चुनाव अधिकारी के अनुसार ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता से तथ्य और आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सत्यापन किया जाता है।

SIR को लेकर कानूनी विवाद क्यों?

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया को लेकर मामला अब अदालत तक भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से ‘logical discrepancies’ के आधार पर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उसके प्रभाव पर सवाल उठाए हैं।

इसका मतलब यह है कि विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, दस्तावेजों की आवश्यकता, सत्यापन की पद्धति और मतदाता के अधिकार जैसे मुद्दे कानूनी बहस का हिस्सा बन चुके हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?

चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करना है।

दिल्ली CEO की आधिकारिक SIR योजना में स्पष्ट किया गया है कि लक्ष्य है कि कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न रहे। इसके लिए Enumeration Form, BLO सत्यापन, दावे-आपत्तियां और अंतिम सूची प्रकाशित करने जैसी प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं।

आयोग ने हाल में यह भी स्पष्ट किया कि किसी मतदाता को नोटिस मिलने को सीधे नाम हटाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

दिल्ली की मतदाता सूची में कितना बदलाव हुआ?

31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97,53,577 मतदाता दर्ज थे। यह 30 जून की सूची में मौजूद 1,45,10,299 मतदाताओं की तुलना में काफी कम संख्या है। इसी बड़े अंतर ने SIR को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज किया है।

हालांकि, ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं होती। दावा और आपत्ति की प्रक्रिया तथा नोटिस के बाद सत्यापन के आधार पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव है।

SIR प्रक्रिया को ऐसे समझें

पुरानी मतदाता सूची
↓
घर-घर Enumeration / रिकॉर्ड सत्यापन
↓
डेटा में विसंगति या No Mapping की पहचान
↓
जरूरत पड़ने पर नोटिस
↓
दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत करने का अवसर
↓
BLO/निर्वाचन अधिकारियों द्वारा सत्यापन
↓
दावे और आपत्तियों का निपटारा
↓
अंतिम मतदाता सूची

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। नोटिस पाने वाले मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस पूरे विवाद में फिलहाल तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं—किस आधार पर किसी मतदाता को नोटिस मिला, सत्यापन के बाद उसका रिकॉर्ड किस तरह तय होता है और अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल या बाहर रहते हैं।

यही प्रक्रिया आने वाले चरण में यह स्पष्ट करेगी कि वर्तमान ड्राफ्ट सूची में हुए बड़े बदलावों में से कितने स्थायी होंगे और कितने सत्यापन या दावे-आपत्तियों के बाद बदलेंगे। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन तक SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

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