Monday, 26 October 2026
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यूपी में मारा गया झारखंड का मोस्ट वांटेड: टीपीसी कमांडर बृजेश गंझू मुठभेड़ में ढेर, दो पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे

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अवतार न्यूज़ संवाददाता

वाराणसी में 30 लाख के इनामी TPC कमांडर बृजेश गंझू का एनकाउंटर, चतरा से जुड़ा था नक्सली नेटवर्क

वाराणसी/चतरा: झारखंड के चतरा जिले से जुड़े प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी में हुई मुठभेड़ में मार गिराया है। पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार बृजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसमें झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम शामिल था।

रविवार, 20 सितंबर की सुबह वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में यूपी ATS की टीम और बृजेश गंझू के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान बृजेश ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कौन था बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता?

बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। पुलिस के अनुसार वह प्रतिबंधित संगठन TPC में महत्वपूर्ण कमांडर की भूमिका में था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की तलाश में था।

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आकाशवाणी की रिपोर्ट के मुताबिक, बृजेश करीब दो दशक से फरार था और उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, आगजनी, आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारियों पर हमले समेत 50 से अधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।

NIA से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके खिलाफ टेरर फंडिंग और रंगदारी समेत कई गंभीर आरोपों की जांच चल रही थी।

वाराणसी में कैसे हुई मुठभेड़?

रिपोर्टों के मुताबिक, यूपी ATS को बृजेश गंझू के वाराणसी में होने की सूचना मिली थी। इसके बाद रामनगर इलाके में टीम ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी।

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पुलिस के अनुसार, बृजेश अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से जा रहा था। टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान कथित तौर पर उसने पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी और भागने की कोशिश की।

इसके बाद दोनों तरफ से फायरिंग हुई। जवाबी कार्रवाई में बृजेश को गोली लगी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोली

मुठभेड़ के दौरान पुलिस के मुताबिक, बृजेश की ओर से की गई फायरिंग में यूपी ATS के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी। दोनों पुलिसकर्मी सुरक्षित बताए गए हैं।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल से हथियार भी बरामद किए गए हैं और बृजेश के अन्य सहयोगियों की तलाश जारी रहने की बात सामने आई है।

30 लाख रुपये का था इनाम

बृजेश गंझू की गिरफ्तारी के लिए घोषित इनाम को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों ने जानकारी दी है।

एजेंसी घोषित इनाम
झारखंड सरकार ₹25 लाख
NIA ₹5 लाख
कुल ₹30 लाख

इस तरह बृजेश गंझू झारखंड के उन वांछित नक्सली कमांडरों में शामिल था, जिसके खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने लंबे समय तक कार्रवाई जारी रखी थी।

चतरा में दर्ज थे कई मामले

जांच एजेंसियों और पुलिस की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, बृजेश गंझू के खिलाफ चतरा और अन्य क्षेत्रों में कई गंभीर मामले दर्ज थे। इनमें हिंसा, रंगदारी, आगजनी, अपहरण और सुरक्षाबलों पर हमले जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं।

आकाशवाणी के अनुसार, उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में मामलों की संख्या और विवरण में अंतर हो सकता है।

TPC और झारखंड में नक्सली गतिविधियां

तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी TPC झारखंड में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है। संगठन का प्रभाव विशेष रूप से चतरा और आसपास के क्षेत्रों में रहा है।

बृजेश गंझू को संगठन के प्रमुख कमांडरों में शामिल बताया जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उस पर रंगदारी और संगठन के लिए धन जुटाने सहित कई गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे।

लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में था

बृजेश गंझू लंबे समय से फरार चल रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2006 के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। समय के साथ उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या बढ़ती गई और वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित बना रहा।

उसके खिलाफ NIA से जुड़े मामले भी थे। यही वजह रही कि उसकी गिरफ्तारी के लिए झारखंड पुलिस के अलावा केंद्रीय जांच एजेंसी भी सक्रिय थी।

ATS टीम को मिलेगा 2 लाख रुपये का इनाम

मुठभेड़ के बाद उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कार्रवाई में शामिल ATS टीम के लिए 2 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है।

इस कार्रवाई के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां बृजेश गंझू से जुड़े नेटवर्क और उसके संपर्कों की भी जांच कर रही हैं। खासतौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि वह वाराणसी में किस उद्देश्य से मौजूद था और उसके साथ कौन-कौन लोग संपर्क में थे।

अब नजर इस पर

वाराणसी में बृजेश गंझू की मौत के बाद जांच का अगला फोकस उसके सहयोगियों, संभावित ठिकानों, हथियारों और संपर्क नेटवर्क पर रहेगा। झारखंड में उसके खिलाफ दर्ज मामलों और NIA से जुड़े मामलों की जांच के संदर्भ में भी इस कार्रवाई के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

चतरा से निकलकर लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर रहे बृजेश गंझू का वाराणसी में मुठभेड़ में मारा जाना अब झारखंड के TPC नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच में एक अहम घटनाक्रम बन गया है।

Md Asif Equbal

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