रांची/जमशेदपुर: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी JSSC-CGL भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने केंद्र की जांच एजेंसी CBI से जांच कराने की मांग दोहराई है। मरांडी ने सवाल उठाया है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की बात सामने आई है, तो जांच केवल निचले स्तर तक सीमित क्यों रहे और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही है।
जेएसएससी-सीजीएल: परीक्षा धांधली पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल, बोले- सीबीआई जांच से ही सामने आएगा पूरा सच
क्या है पूरा JSSC-CGL विवाद?
JSSC-CGL परीक्षा झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसकी परीक्षा सितंबर 2024 में आयोजित हुई थी। बाद में परीक्षा की प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच सवाल उठे और मामला जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा।
विवाद बढ़ने के बाद झारखंड की CID ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों से पूछताछ और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। सितंबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने सैकड़ों सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की है और कई लोगों को मामले में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से दोषी ठहराना जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।
हाईकोर्ट में मामला, सरकार के हलफनामे पर भी उठे सवाल
JSSC-CGL विवाद फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। इसी कानूनी प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल हालिया हलफनामे को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाए हैं।
मरांडी का कहना है कि सरकार के हालिया जवाब में परीक्षा प्रक्रिया को अनियमितताओं से प्रभावित बताया गया है। उनका सवाल है कि यदि सरकार के सामने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियों के तथ्य थे, तो पहले अदालत के समक्ष दाखिल किए गए जवाबों में स्थिति अलग क्यों दिखाई गई थी।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत में दाखिल अलग-अलग जवाबों में सामने आए तथ्यों के बीच अंतर होने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, इन दावों और दस्तावेजों की अंतिम न्यायिक व्याख्या अदालत के स्तर पर ही होगी।
CID जांच पर क्यों सवाल उठा रहे हैं मरांडी?
बाबूलाल मरांडी ने मौजूदा CID जांच की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई थीं, तो पहले की जांच में ये तथ्य सामने क्यों नहीं आए।
मरांडी का कहना है कि मामले की जांच ऐसी स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए जिस पर राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव का सवाल न उठे। इसी आधार पर वह CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
वहीं, इस मामले में सफल अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुछ सफल अभ्यर्थियों ने चिंता जताई है कि लंबे समय तक चलने वाला विवाद और जांच उनकी नियुक्तियों एवं भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
किन अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग?
मरांडी ने भर्ती प्रक्रिया और जांच से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और CID के ADG मनोज कौशिक की भूमिका और जवाबदेही की जांच की मांग उठाई है। उन्होंने कुछ अधिकारियों को उनके पद से हटाने की मांग भी की है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी अधिकारी का नाम जांच की मांग में आने मात्र से उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। वास्तविक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं
JSSC-CGL विवाद के बीच झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस भी चल रही है। भाजपा की ओर से JSSC और JPSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन भी किया गया है।
विपक्ष का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है क्योंकि इन परीक्षाओं से बड़ी संख्या में युवाओं का भविष्य जुड़ा होता है। दूसरी ओर, जांच के दायरे में आने वाले मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी और अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगा।
हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की अहमियत
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC और JSSC से जुड़ी कथित परीक्षा अनियमितताओं की CID जांच की निगरानी के लिए एक पूर्व न्यायाधीश की नियुक्ति की है। इसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी बनाए रखना और मामले की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों को संबोधित करना है।
ऐसे में अब इस मामले में तीन स्तर महत्वपूर्ण हो गए हैं—CID की जांच, हाईकोर्ट की कार्यवाही और विपक्ष की CBI जांच की मांग।
युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल क्या?
JSSC-CGL विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि उन अभ्यर्थियों का भविष्य है जिन्होंने परीक्षा की तैयारी में वर्षों लगाए हैं।
यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। वहीं, यदि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बिना किसी गलती के चयन प्रक्रिया से जुड़े हैं, तो उनके हितों और नियुक्ति संबंधी अधिकारों को भी ध्यान में रखना होगा।
यही कारण है कि जांच की दिशा और अदालत के अगले आदेश पर अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।
अब नजर इस पर
JSSC-CGL मामले में आने वाले समय में हाईकोर्ट की सुनवाई, CID की जांच की प्रगति, सरकार का पक्ष और CBI जांच की मांग पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी। रिपोर्टों के अनुसार मामले की अगली महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यवाही 7 अक्टूबर 2026 को होनी है।
फिलहाल, बाबूलाल मरांडी ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा है कि कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। दूसरी ओर, मामले में अंतिम तथ्य और जिम्मेदारी जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम से ही स्पष्ट होगी।
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