वहीं दूसरी ओर सिया और उनके परिवार की ओर से इन दावों को खारिज किया गया है। सिया का आरोप है कि कार उनका पीछा कर रही थी और जानबूझकर उनकी बाइक को टक्कर मारी गई। मामले में वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान से गिरफ्तार किया है और मामले में हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा भी जोड़ी गई है।
गुरुग्राम हिट एंड रन केस: कल्याण बैंसला के वकील ने सिया पर लगाए गंभीर आरोप, जानें पूरा मामला
क्या है पूरा मामला?
गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर रविवार को एक महिला बाइक राइडर और कार के बीच हुई टक्कर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक कार बाइक के पास आती और टक्कर के बाद महिला बाइक सवार सड़क पर गिरती दिखाई देती है। हादसे में सिया को चोटें आईं, हालांकि उनकी स्थिति गंभीर नहीं बताई गई।
घटना के बाद सिया की बाइक पर लगे कैमरे से रिकॉर्ड वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और पुलिस ने भी घटना का संज्ञान लिया।
सिया ने आरोप लगाया कि कार में सवार लोग उनका पीछा कर रहे थे और उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि इसके बाद कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। सिया ने यह भी दावा किया कि कार में मौजूद लोग नशे में दिखाई दे रहे थे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए ही हो सकेगी।
आरोपी के वकील ने क्या दावा किया?
आरोपी कल्याण बैंसला की ओर से वकील नवीन बैंसला ने घटना की अलग तस्वीर पेश की है। बचाव पक्ष का दावा है कि घटना के समय सड़क पर कई बाइकर्स तेज रफ्तार से चल रहे थे और बार-बार कार को ओवरटेक कर रहे थे।
वकील के अनुसार, करीब 25 बाइकर्स कार के आसपास लगातार ओवरटेक कर रहे थे। बचाव पक्ष ने दावा किया कि सिया की बाइक की रफ्तार लगभग 140 से 170 किलोमीटर प्रति घंटे तक थी और इसी दौरान मोड़ पर बाइक तथा कार की दिशा बदलने के कारण टक्कर हुई।
हालांकि, बाइक की वास्तविक स्पीड और दुर्घटना के तकनीकी कारणों का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच, सीसीटीवी, बाइक कैमरा फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
‘यह हिट एंड रन नहीं, लापरवाही का मामला’
बचाव पक्ष ने इस घटना को सीधे तौर पर जानबूझकर किया गया हिट एंड रन मानने पर भी सवाल उठाए हैं। वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल ने जानबूझकर बाइक को निशाना नहीं बनाया था।
आरोपी पक्ष का तर्क है कि यदि पूरी घटना और उससे पहले की परिस्थितियों को देखा जाए तो मामला सड़क पर हुई कथित लापरवाही और गलत ड्राइविंग से जुड़ा हो सकता है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा है कि वायरल वीडियो में घटना का पूरा संदर्भ दिखाई नहीं देता और उससे पहले की घटनाओं को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।
140-170 KM/H की स्पीड पर क्या है विवाद?
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सिया की कथित स्पीड को लेकर हो रही है। आरोपी पक्ष ने दावा किया है कि महिला बाइक राइडर बहुत तेज गति से बाइक चला रही थीं।
कल्याण बैंसला की ओर से यह भी कहा गया कि कई बाइकर्स तेज रफ्तार में कार को ओवरटेक कर रहे थे। बचाव पक्ष का दावा है कि इसी दौरान बाइक के अचानक दिशा बदलने और कार की दिशा बदलने से टक्कर हुई।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि 140-170 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड का दावा अभी आरोपी पक्ष का बयान है, इसे जांच एजेंसियों द्वारा अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी सवाल
आरोपी पक्ष ने घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। बचाव पक्ष का आरोप है कि मामले को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा तूल दिया गया और वीडियो के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया।
कुछ रिपोर्टों में आरोपी के वकील की ओर से यह दावा सामने आया है कि वीडियो और घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज हासिल करने की कोशिश की गई।
दूसरी तरफ सिया का कहना है कि उन्होंने घटना के बाद अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए घटना का वीडियो सार्वजनिक किया। इसलिए सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दोनों पक्षों का नजरिया पूरी तरह अलग है।
हादसे के बाद आरोपी मौके से क्यों गया?
इस केस में सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि टक्कर के बाद कार मौके पर क्यों नहीं रुकी?
कल्याण बैंसला ने अपने पक्ष में कहा है कि उन्हें और उनके साथ मौजूद परिवार के सदस्यों को डर था कि वहां मौजूद बाइकर्स उनके साथ मारपीट कर सकते हैं। उनका दावा है कि यदि वे तुरंत रुकते तो भीड़ उन्हें घेर सकती थी और उन पर हमला हो सकता था। इसी कथित डर के कारण वे वहां से चले गए।
बैंसला के अनुसार, घटना के बाद उन्होंने कुछ दूरी पर रुकने और बात करने की कोशिश भी की थी। उनका कहना है कि परिवार साथ होने के कारण उन्हें स्थिति बिगड़ने का डर था।
दूसरी ओर, सिया ने इसी बात पर आरोपी से सवाल किया है कि यदि टक्कर जानबूझकर नहीं हुई थी तो हादसे के तुरंत बाद रुककर घायल बाइक सवार की मदद क्यों नहीं की गई।
सिया ने आरोपी के दावों पर क्या कहा?
सिया ने आरोपी पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कार ने उनका पीछा किया और उसके बाद उनकी बाइक को टक्कर मारी गई।
उन्होंने आरोपी के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि उसे यह पता नहीं था कि बाइक पर महिला सवार है। सिया ने कहा कि घटना के दौरान कार और बाइक के बीच की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट था कि सामने कौन सवार था।
सिया का यह भी कहना है कि यदि आरोपी को दुर्घटना का अफसोस था तो उसे मौके पर रुककर उनकी मदद करनी चाहिए थी।
वायरल वीडियो बना मामले की अहम कड़ी
इस पूरे मामले में बाइक पर लगे कैमरे से रिकॉर्ड फुटेज बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ही घटना ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया और पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज की।
इसके अलावा पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई। रिपोर्टों के मुताबिक जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया और मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
मामले में पुलिस ने कल्याण बैंसला को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटना से जुड़े अन्य सबूतों को शामिल किया जा रहा है।
ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दुर्घटना के लिए पूरी तरह कौन जिम्मेदार था। आरोपी पक्ष ने अपनी सफाई में बाइकर्स की तेज रफ्तार और कथित लापरवाही को कारण बताया है, जबकि सिया पक्ष ने जानबूझकर पीछा करने और टक्कर मारने का आरोप लगाया है।
पुलिस जांच से साफ होगी सच्चाई
गुरुग्राम का यह मामला अब केवल सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें सड़क पर बाइकिंग, तेज रफ्तार, रोड रेज, महिलाओं की सुरक्षा, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और हादसे के बाद मौके से जाने जैसे कई सवाल जुड़े हैं।
फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
डिस्क्लेमर: इस खबर में आरोपी पक्ष और सिया पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों/दावों को उनके संबंधित बयानों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। मामले की वास्तविक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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