उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: आंशिक ध्वस्तीकरण के विरोध में सैकड़ों लोग जुटे

सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत मस्जिद के कुछ हिस्से हटाने की योजना का विरोध; मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात, मामले की कानूनी सुनवाई भी जारी
उज्जैन, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के उज्जैन में ऐतिहासिक शाही मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ गया है। मस्जिद के प्रस्तावित आंशिक ध्वस्तीकरण के विरोध में रविवार को सैकड़ों मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद के अंदर और आसपास जुटे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को हटाए जाने का विरोध शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे हैं।
मामला सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है। उज्जैन नगर निगम जिस सड़क को चौड़ा करने की योजना पर काम कर रहा है, उसके प्रस्तावित अलाइनमेंट में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा है। अधिकारियों के अनुसार सड़क को चौड़ा करने का उद्देश्य आगामी बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना है।
मस्जिद को लेकर क्या है विवाद?
मस्जिद के प्रबंधन और स्थानीय समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यह ऐतिहासिक धार्मिक स्थल करीब 636 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण वर्ष 1390 के आसपास हुआ था। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने भी इसकी प्राचीनता का दावा किया है। हालांकि, मस्जिद की उम्र से संबंधित दावे स्थानीय पक्ष द्वारा किए गए हैं।
प्रस्तावित कार्रवाई में मस्जिद के उस हिस्से को हटाया जाना है जो सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आता है। रिपोर्टों में नमाज कक्ष के एक हिस्से, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक से जुड़े हिस्से का उल्लेख किया गया है।
रातभर मस्जिद में मौजूद रहे लोग
रविवार को बड़ी संख्या में लोग मस्जिद परिसर में पहुंचे। कई लोग रातभर वहां मौजूद रहे और कुछ लोगों ने शिफ्ट में मस्जिद के अंदर रहने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध करना और प्रशासन से मस्जिद को सड़क चौड़ीकरण योजना से बाहर रखने की मांग करना है।
स्थानीय लोगों की ओर से यह भी सवाल उठाया गया है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद की बजाय सड़क के दूसरी तरफ मौजूद निर्माण को हटाने का विकल्प क्यों नहीं अपनाया जा सकता।
मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स और एसटीएफ की तैनाती की गई तथा बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों ने इलाके में फ्लैग मार्च किया।
इस बीच, मस्जिद के आसपास जेसीबी मशीनों की मौजूदगी की भी रिपोर्ट सामने आई। विरोध के कारण प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी और बड़ी संख्या में लोग मस्जिद परिसर में मौजूद रहे।
हाईकोर्ट में भी मामला पहुंचा
मस्जिद के आंशिक ध्वस्तीकरण को लेकर कानूनी लड़ाई भी चल रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 9 सितंबर 2026 को मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने से संबंधित याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत के आदेश के अनुसार, इसी सड़क पर अन्य धार्मिक संरचनाओं के हिस्सों पर भी कार्रवाई की गई थी।
इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से आगे कानूनी कार्रवाई की गई। 28 सितंबर को इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की रिपोर्ट है। इसलिए प्रशासनिक कार्रवाई और अदालत की कार्यवाही दोनों पर नजर बनी हुई है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत सड़क और यातायात व्यवस्था को मजबूत करने का काम चल रहा है। दूसरी ओर, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों की आपत्तियां भी सामने आ रही हैं।
शाही मस्जिद का मामला इसी व्यापक सड़क चौड़ीकरण योजना के बीच सामने आया है। प्रशासन को एक तरफ प्रस्तावित विकास कार्य को आगे बढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संबंधित पक्षों की आपत्तियों को संभालना है।
अब नजर इस पर
फिलहाल उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई, विरोध प्रदर्शन और अदालत की सुनवाई तीनों महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और प्रशासन के अगले कदम से यह स्पष्ट होगा कि सड़क चौड़ीकरण की योजना में मस्जिद के प्रभावित हिस्से को लेकर क्या स्थिति बनती है।
कमेंट करें