AI आशा के साथ चिंता भी’: जयशंकर बोले- हर देश को अपने AI सिस्टम विकसित करने की आजादी, दुरुपयोग से भी किया आगाह

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर भारत का रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि AI में लोगों को सशक्त बनाने, आर्थिक विकास को गति देने और बड़ी वैश्विक समस्याओं से निपटने की क्षमता है, लेकिन इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है।
जयशंकर ने कहा कि प्रत्येक देश को अपने राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं के अनुसार अपना AI इकोसिस्टम विकसित करने और यह तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि AI का इस्तेमाल किस तरह किया जाए। उनके मुताबिक, दुनिया के सभी देशों पर AI विकास और इस्तेमाल का एक ही मॉडल लागू नहीं किया जा सकता।
हर देश अपने हिसाब से विकसित करे AI सिस्टम
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत प्रत्येक देश के अपने इकोसिस्टम को आकार देने के अधिकार में विश्वास करता है। इसका मतलब है कि देशों को अपनी जरूरतों, संसाधनों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार AI मॉडल और तकनीकी क्षमताएं विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।
AI को लेकर वैश्विक स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। कुछ देश इसे आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं, जबकि इसके साथ डेटा, सुरक्षा, गोपनीयता, गलत सूचना और अन्य संभावित जोखिमों को लेकर भी चर्चा हो रही है।
AI से विकास और लोगों को सशक्त बनाने की उम्मीद
जयशंकर ने AI के सकारात्मक पक्ष पर भी जोर दिया। उन्होंने इसे ऐसी तकनीक बताया जो लोगों को सशक्त बनाने के साथ आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है और बड़े स्तर की समस्याओं से निपटने में मदद कर सकती है।
भारत ने फरवरी 2026 में आयोजित AI Impact Summit का भी उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि भारत AI को ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारियों का हिस्सा बनाना चाहता है।
इसका उद्देश्य AI के क्षेत्र में विकास के लाभों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने और विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ाने से जुड़ा है।
AI के दुरुपयोग को लेकर जयशंकर की चेतावनी
AI के फायदे गिनाने के साथ ही विदेश मंत्री ने इसके गलत इस्तेमाल को लेकर सावधान भी किया। उनके अनुसार AI का दुरुपयोग मौजूदा पूर्वाग्रहों को और गहरा कर सकता है तथा समाज में आपसी सम्मान को कमजोर कर सकता है।
यही वजह है कि AI के विकास के साथ उसके जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर भी वैश्विक चर्चा जरूरी मानी जा रही है। तकनीक का इस्तेमाल किस उद्देश्य से और किस तरीके से किया जाता है, इसका प्रभाव समाज और अर्थव्यवस्था पर व्यापक हो सकता है।
दुनिया पर एक ही AI मॉडल थोपने के पक्ष में नहीं भारत
जयशंकर के बयान में राष्ट्रीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं को खास महत्व दिया गया। उन्होंने संकेत दिया कि AI के क्षेत्र में सभी देशों के लिए एक जैसा मॉडल जरूरी नहीं है।
हर देश अपनी परिस्थितियों के आधार पर यह तय कर सकता है कि वह किन AI प्रणालियों को विकसित करना चाहता है और उनका इस्तेमाल किन क्षेत्रों में करेगा। यह दृष्टिकोण तकनीकी विकास में अलग-अलग देशों की जरूरतों और क्षमताओं को ध्यान में रखने पर जोर देता है।
बहुध्रुवीय दुनिया और तकनीकी बदलाव
जयशंकर ने AI के मुद्दे को दुनिया में हो रहे व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों से भी जोड़ा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर काफी आगे बढ़ चुकी है।
उनके अनुसार 1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब बदलती वास्तविकताओं का सामना कर रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भी मौजूदा दुनिया की विविधता को प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता है।
AI के भविष्य में सहयोग और जिम्मेदारी अहम
AI तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था और समाज का हिस्सा बन रहा है। ऐसे में इसके विकास के साथ-साथ इसके सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर चर्चा भी महत्वपूर्ण हो गई है।
जयशंकर के संबोधन में AI को लेकर दो पहलू दिखाई दिए—एक तरफ तकनीक से विकास और मानव सशक्तीकरण की उम्मीद, वहीं दूसरी तरफ इसके दुरुपयोग और पूर्वाग्रहों को बढ़ाने की संभावित चिंता।
भारत का रुख इस बात पर केंद्रित है कि AI के विकास में विभिन्न देशों की भागीदारी हो और तकनीक के लाभों को व्यापक स्तर पर पहुंचाया जाए। साथ ही, इसके इस्तेमाल से जुड़े संभावित जोखिमों को नजरअंदाज न किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में AI को लेकर जयशंकर का बयान ऐसे समय में आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वैश्विक स्तर पर तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने एक ओर देशों के अपने AI सिस्टम विकसित करने के अधिकार की बात कही, वहीं AI के दुरुपयोग से पैदा होने वाले संभावित सामाजिक प्रभावों को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता भी बताई।
स्रोत: संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन पर प्रकाशित रिपोर्ट।
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