Wednesday, 7 October 2026
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ब्लड चाहिए तो बस एक कॉल: झारखंड में शुरू होगी नई व्यवस्था, रांची में बनेगा कमांड सेंटर

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अवतार न्यूज़ संवाददाता

Jharkhand Blood Supply: झारखंड में मरीजों और उनके परिजनों को ब्लड की व्यवस्था के लिए अलग-अलग ब्लड बैंक और अस्पतालों के चक्कर लगाने से राहत देने की तैयारी है। राज्य सरकार एक ऐसी व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिसमें जरूरत पड़ने पर टोल-फ्री नंबर पर एक कॉल करके रक्त की मांग दर्ज कराई जा सकेगी। सरकार ने कॉल मिलने के बाद अधिकतम चार घंटे के भीतर रक्त उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।

इस पूरी व्यवस्था की निगरानी और संचालन के लिए राजधानी रांची में एक केंद्रीय कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नई व्यवस्था को अगले 90 दिनों यानी करीब तीन महीने के भीतर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वास्थ्य विभाग और एमएस साइंस के बीच हुआ समझौता

इस नई रक्त आपूर्ति व्यवस्था को लागू करने के लिए झारखंड स्वास्थ्य विभाग और एमएस साइंस कंपनी के बीच एमओयू किया गया है। समझौते के तहत कंपनी को रक्त के संग्रह से लेकर उसकी जांच, स्टोरेज, रखरखाव और जरूरत वाले अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

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स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की मौजूदगी में हुए इस समझौते के बाद विभाग ने इस व्यवस्था को राज्यभर में लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

सरकार का उद्देश्य ऐसी स्थिति को कम करना है, जिसमें किसी गंभीर मरीज के परिजन को अचानक रक्त की जरूरत पड़ने पर एक ब्लड बैंक से दूसरे ब्लड बैंक तक जाना पड़े।

रांची से पूरे झारखंड पर नजर रखेगा कमांड सेंटर

नई व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा रांची में बनने वाला केंद्रीय कमांड सेंटर होगा।

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यहीं से राज्य में ब्लड की उपलब्धता और मांग से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। मरीज या उसके परिजन जब निर्धारित टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करेंगे, तो उनकी रक्त संबंधी जरूरत को सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद उपलब्धता के आधार पर संबंधित प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य है कि मांग दर्ज होने के बाद चार घंटे के भीतर रक्त उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, यह समय-सीमा सेवा शुरू होने के बाद वास्तविक संचालन, उपलब्ध स्टॉक, रक्त समूह और अस्पताल की स्थिति जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

सिर्फ डिलीवरी नहीं, ब्लड कलेक्शन की भी जिम्मेदारी

इस योजना में केवल मरीज तक ब्लड पहुंचाना ही शामिल नहीं है। एजेंसी को रक्त संग्रह, जांच, स्टोरेज और रखरखाव जैसी जिम्मेदारियां भी दी गई हैं।

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रक्त की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ एनसीसी, एनएसएस, पुलिस बल और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से रक्तदान अभियान चलाने की योजना है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जाएगा, जबकि मानव संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी एजेंसी संभालेगी।

90 दिनों में शुरू करने का लक्ष्य

स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरी व्यवस्था को करीब 90 दिनों में शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आने वाले समय में रक्तदान को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

सरकार की योजना केवल आपात स्थिति में रक्त उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्याप्त रक्त संग्रह बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। क्योंकि किसी भी ऑन-डिमांड ब्लड सप्लाई सिस्टम की सफलता के लिए पर्याप्त और सुरक्षित रक्त स्टॉक जरूरी होगा।

मरीजों और परिजनों को क्या फायदा होगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जरूरतमंद मरीजों के परिजनों के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।

मौजूदा स्थिति में अक्सर:

  • परिजनों को अलग-अलग ब्लड बैंक से संपर्क करना पड़ता है।
  • उपलब्ध रक्त समूह की जानकारी जुटाने में समय लगता है।
  • रक्त की व्यवस्था के लिए अस्पताल से बाहर जाना पड़ सकता है।
  • आपात स्थिति में समय का दबाव बढ़ जाता है।

नई व्यवस्था का लक्ष्य:

  • एक टोल-फ्री नंबर के जरिए मांग दर्ज करना।
  • राज्यस्तरीय कमांड सेंटर से निगरानी।
  • उपलब्ध रक्त की व्यवस्था करना।
  • जांच और स्टोरेज के बाद संबंधित अस्पताल तक पहुंचाना।
  • अधिकतम चार घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का लक्ष्य।

अभी जारी नहीं हुआ टोल-फ्री नंबर

इस योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि टोल-फ्री नंबर अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्टों में बताया गया है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इसके लिए नंबर जारी करेगा। इसलिए फिलहाल किसी अनधिकृत नंबर या सोशल मीडिया पर प्रसारित हेल्पलाइन पर भरोसा करने से बचना चाहिए।

ग्रामीण झारखंड पर भी रहेगा फोकस

झारखंड के कई हिस्सों में अस्पताल और रक्त बैंक दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसे में ग्रामीण मरीजों के लिए समय पर रक्त उपलब्ध कराना इस व्यवस्था की बड़ी चुनौती भी होगी।

इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में रक्तदान शिविर बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रक्त संग्रह को मजबूत करने की बात कही है। एनसीसी, एनएसएस, पुलिस बल और अन्य संस्थाओं को भी रक्तदान अभियान से जोड़ने की योजना है।

आगे क्या?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि स्वास्थ्य विभाग टोल-फ्री नंबर कब जारी करता है, रांची कमांड सेंटर कब पूरी तरह सक्रिय होता है और 90 दिनों की निर्धारित समयसीमा में यह व्यवस्था किस तरह राज्य के अलग-अलग जिलों तक पहुंचती है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी होगा कि आपात स्थिति में अलग-अलग ब्लड ग्रुप और ब्लड कंपोनेंट की उपलब्धता को किस तरह रियल-टाइम में मैनेज किया जाता है। यदि सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो मरीजों के परिजनों के लिए रक्त की तलाश और समन्वय की प्रक्रिया को एक केंद्रीय व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास होगा।

नोट: टोल-फ्री नंबर अभी जारी नहीं हुआ है, इसलिए खबर में कोई नंबर प्रकाशित नहीं किया गया है।

Md Asif Equbal

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