सीकर के केरपुरा गांव से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचीं
मेजर नव्या शेखावत मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के केरपुरा गांव की रहने वाली बताई जाती हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का उनका सफर युवाओं और खासकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, नव्या ने UPSC की Combined Defence Services यानी CDS परीक्षा के जरिए भारतीय सेना में प्रवेश का रास्ता बनाया। CDS-I 2020 की महिला नॉन-टेक्निकल मेरिट लिस्ट में उनका नाम शामिल था। इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित Officers Training Academy (OTA) से सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया।
2021 में भारतीय सेना में मिली कमीशन
OTA चेन्नई में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नव्या शेखावत को वर्ष 2021 में Indian Army Service Corps में कमीशन मिला। आर्मी सर्विस कॉर्प्स सेना की सप्लाई, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल सपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़ी होती है। करीब पांच वर्ष के सैन्य करियर में वह मेजर के पद तक पहुंचीं।
अब राष्ट्रपति की ADC के रूप में उनकी नियुक्ति उनके सैन्य करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
क्या होता है राष्ट्रपति के ADC का काम?
राष्ट्रपति के ADC की भूमिका केवल राष्ट्रपति के साथ किसी समारोह में नजर आने तक सीमित नहीं होती। ADC राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों, सैन्य प्रोटोकॉल और विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं।
परंपरागत रूप से राष्ट्रपति के साथ पांच ADC होते हैं। इनमें तीन अधिकारी सेना से तथा एक-एक अधिकारी नौसेना और वायुसेना से होते हैं।
नव्या शेखावत ने रचा इतिहास
मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि वह भारतीय सेना से राष्ट्रपति की ADC बनने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। हालांकि, तीनों सेनाओं को मिलाकर वह पहली महिला राष्ट्रपति ADC नहीं हैं।
इससे पहले वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी राष्ट्रपति की पहली महिला सैन्य ADC बनी थीं। इस लिहाज से नव्या शेखावत राष्ट्रपति की ADC बनने वाली दूसरी महिला सैन्य अधिकारी हैं, लेकिन भारतीय थल सेना से इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं।
नव्या शेखावत के परिवार में कौन-कौन?
मेजर नव्या शेखावत के परिवार को लेकर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उनका परिवार भी सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके पिता कैप्टन करण सिंह शेखावत रहे हैं, जबकि उनके दादा विंग कमांडर भंवर सिंह शेखावत बताए जाते हैं।
सैन्य वातावरण में पली-बढ़ी नव्या ने आगे चलकर खुद भारतीय सेना को अपना करियर चुना और आज राष्ट्रपति भवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मेजर नव्या शेखावत की उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की एक और मिसाल है। CDS परीक्षा से सेना में प्रवेश लेकर राष्ट्रपति की ADC जैसी प्रतिष्ठित जिम्मेदारी तक पहुंचना उनके अनुशासन, प्रशिक्षण और सैन्य करियर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
सीकर से राष्ट्रपति भवन तक मेजर नव्या शेखावत का सफर उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं।
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