मामला सामने आने के बाद खाद्यान्न परिवहन व्यवस्था और उसकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि यदि परिवहन के दौरान ट्रॉली के ऊपर किसी व्यक्ति के बैठने की अनुमति नहीं है, तो फिर मजदूरों को ट्रॉली के ऊपर बैठाकर वाहन को सड़क पर कैसे चलने दिया जा रहा है।
लगातार खबरों के बावजूद व्यवस्था पर सवाल
सरकारी खाद्यान्न के परिवहन को लेकर जिले के अलग-अलग प्रखंडों से समय-समय पर नियमों की अनदेखी से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। इन मामलों को लेकर खबरें प्रकाशित होने के बावजूद यदि इसी तरह की तस्वीरें दोबारा सामने आ रही हैं, तो यह संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
परिवहन के दौरान ओवरलोडिंग और ट्रॉली पर लोगों के बैठने से सड़क सुरक्षा का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि गोदाम से वाहन निकलने से पहले उसकी जांच कौन करता है और रास्ते में परिवहन नियमों के पालन की निगरानी किस स्तर पर होती है।
चावल की सुरक्षा को लेकर भी उठते रहे हैं आरोप
वहीं, कुछ डीलरों और ग्रामीणों की ओर से समय-समय पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि चावल की ढुलाई के दौरान ट्रॉली पर बैठे लोग सुनसान स्थान देखकर चावल को रास्ते में उतार देते हैं या ऊपर से फेंक देते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
ऐसे में सवाल यह है कि FCI गोदाम से निकलने के बाद सरकारी चावल की पूरी मात्रा संबंधित डीलर तक सुरक्षित पहुंच रही है या नहीं और परिवहन के दौरान इसकी निगरानी के लिए विभाग की ओर से कौन-सी व्यवस्था लागू है।
विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि महागामा ही नहीं, बल्कि जिले के सभी प्रखंडों में सरकारी खाद्यान्न के परिवहन की व्यवस्था की जांच की जाए। वाहनों की क्षमता, लोडिंग, ट्रॉली पर लोगों की मौजूदगी और खाद्यान्न की सुरक्षित डिलीवरी की निगरानी को लेकर विभाग को स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए।
अवतार न्यूज़ के पास मौजूद वीडियो में महागामा क्षेत्र में चावल से लदी ट्रॉली के ऊपर दो लोग बैठे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति के आधार पर परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
कमेंट करें