Wednesday, 7 October 2026
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NIA Raid in Patna: आतंकी को ढूंढने पहुंची NIA, दूसरे फ्लैट का दरवाजा खटखटाया तो मचा हड़कंप; स्कूटी की डिग्गी से मिले ₹20 लाख

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अवतार न्यूज़ संवाददाता
पटना के चित्रगुप्त नगर में NIA की कार्रवाई के दौरान स्कूटी से करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद होने के बाद जांच तेज।

Patna NIA Raid: बिहार की राजधानी पटना में NIA की कार्रवाई के दौरान उस वक्त पूरा मामला चौंकाने वाला हो गया, जब जिस संदिग्ध की तलाश में जांच एजेंसी पहुंची थी, उसी कार्रवाई के दौरान दूसरे फ्लैट में रहने वाला एक युवक स्कूटी से निकलने की कोशिश करता पकड़ा गया। पुलिस ने स्कूटी की तलाशी ली तो उसकी डिग्गी में रखे बैग से करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद हुए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी रकम युवक के पास कहां से आई और इसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना था।

पटना में NIA की कार्रवाई से खुला नकदी का नया मामला

मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र का है। रिपोर्टों के मुताबिक, NIA, बिहार STF और स्थानीय पुलिस की टीम एक संदिग्ध की तलाश में एक अपार्टमेंट परिसर पहुंची थी। यह कार्रवाई कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही थी।

बताया गया कि जांच एजेंसियों को एक खास व्यक्ति के इस परिसर में मौजूद होने की सूचना मिली थी। टीम ने अपार्टमेंट में पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। इसी दौरान घटनाक्रम ने अचानक अलग मोड़ ले लिया।

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एक दूसरे फ्लैट में मौजूद युवक ने जब परिसर में जांच एजेंसियों की टीम देखी तो वह कथित तौर पर वहां से निकलने की कोशिश करने लगा। वह नीचे पहुंचा और स्कूटी लेकर बाहर जाने की तैयारी कर रहा था। परिसर के बाहर मौजूद STF और स्थानीय पुलिस की टीम ने उसे रोक लिया।

इसके बाद उसकी और स्कूटी की तलाशी ली गई।

🛵 स्कूटी की डिग्गी खुली तो मिला कैश से भरा बैग

तलाशी के दौरान पुलिस को स्कूटी के स्टोरेज कंपार्टमेंट यानी डिग्गी में एक बैग मिला। बैग खोलने पर उसमें बड़ी मात्रा में नकदी मिली।

बिहार के समस्तीपुर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने एक बार फिर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार के समस्तीपुर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने एक बार फिर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, बैग में करीब ₹20 लाख रुपये नकद थे। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने युवक से पूछताछ शुरू की।

पुलिस के मुताबिक, युवक ने रकम को कारोबार से जुड़ा बताया, लेकिन वह कथित तौर पर यह स्पष्ट नहीं कर सका कि पैसे वास्तव में किसके हैं और उन्हें स्कूटी में लेकर जाने की वजह क्या थी। इसके बाद नकदी के स्रोत की जांच शुरू की गई और आयकर विभाग को भी इसकी सूचना दी गई।

👤 कौन है स्कूटी से 20 लाख रुपये के साथ पकड़ा गया युवक?

पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए युवक की पहचान अनमोल कुमार मोदी के रूप में हुई है। उसकी पहचान उसके पास मिले पहचान पत्र के आधार पर किए जाने की बात सामने आई है।

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रिपोर्टों के मुताबिक, अनमोल मूल रूप से पूर्वी चंपारण के चकिया का रहने वाला है और पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में उसका संबंध बताया गया है। स्थानीय स्तर पर उसके कारोबार से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है।

कुछ रिपोर्टों में उसे आयरन रॉड और स्क्रैप के कारोबार से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, इन कारोबारी गतिविधियों और बरामद ₹20 लाख के बीच क्या संबंध है, इसकी जांच एजेंसियां कर रही हैं।

💰 20 लाख रुपये का असली मालिक कौन?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ₹20 लाख रुपये किसके थे?

पूछताछ के दौरान युवक द्वारा रकम को कारोबार से संबंधित बताए जाने की बात सामने आई है, लेकिन जांच एजेंसियां अब इससे आगे की जानकारी जुटा रही हैं।

जांच के मुख्य सवाल हैं—

  • ₹20 लाख रुपये का स्रोत क्या है?
  • रकम किस व्यक्ति या कारोबारी की है?
  • क्या इस रकम से संबंधित कोई वैध कारोबारी दस्तावेज मौजूद है?
  • पैसे को स्कूटी में रखकर कहां ले जाया जा रहा था?
  • रकम किसे दी जानी थी?
  • क्या इसका NIA की जांच से कोई संबंध है?
  • क्या यह महज एक अलग कारोबारी लेन-देन था?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

⚠️ क्या 20 लाख रुपये का आतंकी कनेक्शन सामने आया?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सिर्फ NIA की कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति से नकदी बरामद होने के आधार पर उस रकम को आतंकी फंडिंग से जोड़ना सही नहीं होगा।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक एजेंसियां अभी यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकदी का स्रोत क्या है और इसका संभावित इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। आयकर विभाग को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई है।

इसलिए फिलहाल ₹20 लाख की बरामदगी को NIA के मूल मामले से सीधे जोड़ने के बजाय इसे जांच के एक अलग महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखना ज्यादा उचित है।

🎯 NIA आखिर किसकी तलाश में पहुंची थी?

इस पूरे घटनाक्रम की दूसरी बड़ी कड़ी उस व्यक्ति से जुड़ी है, जिसकी तलाश में NIA की टीम अपार्टमेंट पहुंची थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, टीम को संदीप गुप्ता नाम के एक संदिग्ध की मौजूदगी के बारे में इनपुट मिला था। हालांकि, जिस समय टीम वहां पहुंची, वह संदिग्ध मौके पर नहीं मिला। इसके बाद तलाशी अभियान के दौरान दूसरे व्यक्ति से नकदी बरामद होने की घटना सामने आई।

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि बाद की कार्रवाई में NIA ने अपार्टमेंट के एक फ्लैट से आतंकी गतिविधियों से जुड़े एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लिया। हालांकि एजेंसी की ओर से सभी आरोपों और बरामदगी का विस्तृत आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया था।

🏢 एक ही अपार्टमेंट में NIA की दोबारा कार्रवाई

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। इसके बाद इसी अपार्टमेंट परिसर में NIA की कार्रवाई दोबारा होने की खबरें सामने आईं।

रिपोर्टों के अनुसार, जांच टीम ने परिसर के अलग-अलग फ्लैटों में तलाशी ली। बाद की रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि कार्रवाई के दौरान 20 लाख रुपये नकद के अलावा करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण मिलने की जानकारी सामने आई। हालांकि इस बरामदगी के विस्तृत आधिकारिक विवरण की पुष्टि एजेंसी की ओर से अलग से किए जाने की आवश्यकता है।

🔎 जांच का रुख अब किस तरफ?

अब जांच एजेंसियों की नजर दो अलग-अलग पहलुओं पर है।

पहला पहलू है NIA का मूल मामला, जिसमें कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े संदिग्धों और उनके नेटवर्क की जांच की जा रही है।

दूसरा पहलू है स्कूटी से मिली ₹20 लाख की नकदी। इस रकम का स्रोत, स्वामित्व और इस्तेमाल जांच का विषय है।

यदि रकम का वैध कारोबारी स्रोत सामने आता है तो जांच एक दिशा में आगे बढ़ेगी। वहीं यदि दस्तावेज और रकम के बीच कोई विसंगति मिलती है, तो एजेंसियां इस मामले को दूसरे कोण से भी देख सकती हैं।

🧾 आयकर विभाग को क्यों दी गई जानकारी?

बड़ी मात्रा में नकद बरामद होने के बाद पुलिस द्वारा आयकर विभाग को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। इसका मकसद रकम के स्रोत और उसके संभावित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करना हो सकता है।

आयकर जांच में यह देखा जा सकता है कि बरामद रकम संबंधित व्यक्ति के घोषित कारोबार, आय और उपलब्ध दस्तावेजों से मेल खाती है या नहीं।

यानी अब सिर्फ पुलिस पूछताछ ही नहीं, बल्कि पैसे का पूरा वित्तीय ट्रेल भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

🧩 रांची से पटना तक जुड़ती जांच की कड़ी

पटना में हुई NIA की कार्रवाई को रिपोर्टों में रांची के RSS कार्यालय पर कथित पेट्रोल बम हमले की जांच से जोड़ा गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, रांची के निवरनपुर इलाके में RSS कार्यालय को कथित तौर पर पेट्रोल बम से निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। इस मामले की जांच आगे चलकर NIA तक पहुंची और एजेंसी ने संभावित संदिग्धों तथा उनसे जुड़े नेटवर्क की जांच शुरू की।

इसी जांच के सिलसिले में पटना में कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, किसी व्यक्ति, नकदी या बरामद सामान को इस मामले से जोड़ने के लिए जांच एजेंसी के आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।


🚨 NIA की रेड से अलग निकला ₹20 लाख का एंगल

पटना की यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक तरफ जांच एजेंसी कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध की तलाश कर रही थी, जबकि दूसरी तरफ उसी परिसर से निकल रहे एक युवक के पास से ₹20 लाख की नकदी मिल गई।

यानी एक ही ऑपरेशन में जांच का फोकस दो अलग-अलग दिशाओं में चला गया—एक तरफ NIA का मूल केस और दूसरी तरफ नकदी का स्रोत।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है या यह महज एक संयोग है?

इसका जवाब आगे की जांच, दस्तावेजों और एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट से सामने आएगा।

🔍 अब नजर इन सवालों के जवाब पर

1. ₹20 लाख रुपये किसके थे?
पुलिस और संबंधित विभाग रकम के वास्तविक स्वामित्व की जानकारी जुटा रहे हैं।

2. पैसे कहां से आए थे?
युवक ने इसे कारोबार से जुड़ा बताया, लेकिन रकम के स्रोत की स्वतंत्र जांच की जा रही है।

3. क्या रकम का NIA केस से संबंध है?
अभी ऐसा कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

4. NIA जिस व्यक्ति को खोज रही थी, उसका क्या हुआ?
रिपोर्टों में संदिग्ध की तलाश और बाद की हिरासत संबंधी अलग-अलग जानकारी सामने आई है; विस्तृत आधिकारिक विवरण का इंतजार है।

5. क्या मामला आगे और बड़ा हो सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नकदी के स्रोत और मूल NIA केस की जांच में एजेंसियों को क्या सबूत मिलते हैं।

📌 पूरी तस्वीर

पटना में NIA की कार्रवाई के दौरान सामने आया यह मामला फिलहाल जांच के कई सिरों को जोड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। एक तरफ एजेंसी कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में संदिग्धों की तलाश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्कूटी से मिली ₹20 लाख की नकदी ने वित्तीय जांच का एक नया एंगल खोल दिया है।

जब तक जांच एजेंसियां नकदी के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष नहीं देतीं, तब तक इसे आतंकी फंडिंग से जोड़कर कोई अंतिम दावा करना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में पूछताछ, वित्तीय दस्तावेज और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस मामले की असली तस्वीर साफ कर सकती है।

Md Asif Equbal

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