Wednesday, 7 October 2026
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गोड्डा में कंचन देवी की मौत मामले की उच्चस्तरीय जांच, नर्सिंग होम का होगा निरीक्षण

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अवतार न्यूज़ संवाददाता

गोड्डा: जिले के नहर चौक स्थित सूर्या नर्सिंग होम में गर्भपात के दौरान महिला की मौत के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। मामले में गोड्डा के उपायुक्त ने संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति में गोड्डा के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), सिविल सर्जन और अंचल अधिकारी (CO), गोड्डा को शामिल किया गया है।

प्रशासन ने जांच समिति को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच के दौरान नर्सिंग होम में महिला के इलाज से संबंधित सभी चिकित्सकीय रिकॉर्ड, उपलब्ध सुविधाओं, डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका तथा संस्थान के वैध दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

गर्भपात के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के बाद बिगड़ी थी महिला की हालत

मामला उस समय सामने आया जब नहर चौक स्थित निजी नर्सिंग होम में उपचार के दौरान कंचन देवी की हालत गंभीर हो गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार महिला गर्भपात कराने के लिए नर्सिंग होम पहुंची थी। उपचार के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव होने की बात सामने आई।

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हालत बिगड़ने के बाद महिला को सदर अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश और दुख का माहौल बन गया।

मृतका के परिजनों ने नर्सिंग होम प्रबंधन और वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में कथित लापरवाही और समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान

महिला की मौत से जुड़ी खबर सामने आने के बाद मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया। इसके बाद उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित करने का निर्णय लिया।

प्रशासन का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामला एक निजी स्वास्थ्य संस्थान में उपचार के दौरान महिला की मौत से जुड़ा है। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी होता है कि मरीज को किस स्थिति में भर्ती किया गया, उसका उपचार किस चिकित्सक की देखरेख में हुआ और गंभीर स्थिति उत्पन्न होने के बाद उसे उचित समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई या नहीं।

तीन सदस्यीय समिति करेगी पूरे मामले की जांच

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गठित समिति में तीन अधिकारियों को शामिल किया गया है—

  • अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), गोड्डा
  • सिविल सर्जन, गोड्डा
  • अंचल अधिकारी (CO), गोड्डा

समिति नर्सिंग होम का निरीक्षण करने के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और चिकित्सकीय अभिलेखों की जांच करेगी।

जांच का उद्देश्य केवल महिला की मौत के तत्काल कारणों को देखना ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाना है कि संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों के उपचार के लिए निर्धारित नियमों और मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

नर्सिंग होम के मेडिकल रिकॉर्ड की होगी जांच

जांच समिति द्वारा नर्सिंग होम में उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसमें मरीज के भर्ती होने का समय, प्रारंभिक स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सकीय जांच, उपचार की प्रक्रिया, दी गई दवाएं, रक्तस्राव की स्थिति, डॉक्टर की मौजूदगी और रेफर किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि महिला की हालत गंभीर होने के बाद उसे किस समय और किन परिस्थितियों में सदर अस्पताल भेजा गया।

जांच में यदि रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध जानकारी में अंतर पाया जाता है तो उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की योग्यता का होगा सत्यापन

जांच समिति नर्सिंग होम में काम करने वाले चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की योग्यता और मेडिकल पंजीकरण का भी सत्यापन करेगी।

इस दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित मरीज के उपचार के लिए जो चिकित्सक अथवा स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे, वे संबंधित चिकित्सा कार्य करने के लिए अधिकृत और योग्य थे या नहीं।

साथ ही नर्सिंग होम में कार्यरत चिकित्सकों की पंजीकरण संबंधी जानकारी और संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जाएगा।

नर्सिंग होम के लाइसेंस और अनुमति की भी होगी जांच

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नर्सिंग होम के लाइसेंस और संचालन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा।

समिति यह जांच करेगी कि संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के पास संचालन के लिए आवश्यक वैध अनुमति और पंजीकरण है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संस्थान जिस प्रकार की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहा था, उसके लिए उसके पास आवश्यक संसाधन और अनुमति मौजूद थी या नहीं।

यदि जांच के दौरान लाइसेंस, पंजीकरण या अन्य जरूरी दस्तावेजों में कोई अनियमितता सामने आती है तो उसे भी रिपोर्ट में दर्ज किया जाएगा।

इलाज में लापरवाही के आरोपों की भी होगी जांच

परिजनों की ओर से इलाज में कथित लापरवाही और देरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच समिति इन आरोपों की भी पड़ताल करेगी।

समिति उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों के बयान, परिजनों से प्राप्त जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह समझने का प्रयास करेगी कि महिला की स्थिति बिगड़ने के बाद क्या आवश्यक चिकित्सकीय कदम समय पर उठाए गए थे।

यह भी देखा जाएगा कि अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में नर्सिंग होम में आवश्यक आपात चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध थी या नहीं और महिला को सदर अस्पताल रेफर करने का निर्णय किस परिस्थिति में लिया गया।

जांच रिपोर्ट से साफ होगी मौत की परिस्थितियां

फिलहाल महिला की मौत को लेकर अलग-अलग आरोप और दावे सामने आए हैं। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

जांच समिति को दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में यदि किसी प्रकार की चिकित्सकीय, प्रशासनिक या नियमों से संबंधित अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

दोष मिलने पर होगी विधि-सम्मत कार्रवाई

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या अन्य अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अंतिम स्थिति जांच समिति की रिपोर्ट और सक्षम अधिकारियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

निजी नर्सिंग होम की निगरानी पर भी उठे सवाल

इस घटना के बाद जिले में संचालित निजी नर्सिंग होम और स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर ऐसे मामलों में जहां मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है, वहां प्रशिक्षित चिकित्सक, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, आपातकालीन व्यवस्था और समय पर रेफरल की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है।

गोड्डा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जिले में सदर अस्पताल सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी की जाती है।

ऐसे में अब इस मामले की जांच रिपोर्ट पर सभी की नजर है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और नर्सिंग होम की ओर से किसी प्रकार की चिकित्सकीय या प्रशासनिक लापरवाही हुई थी या नहीं।

प्रशासन की जांच से परिजनों को न्याय की उम्मीद

कंचन देवी की मौत के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच जिला प्रशासन की ओर से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित किए जाने से मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ी है।

अब जांच समिति के निरीक्षण, मेडिकल रिकॉर्ड के सत्यापन, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की योग्यता की जांच तथा नर्सिंग होम के लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों के परीक्षण के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

दो दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के निर्देश के बाद यह देखना अहम होगा कि समिति की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या लापरवाही प्रमाणित होती है तो प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

Md Asif Equbal

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