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कल हड़ताल पर रहेंगे वकील: दिल्ली की सभी जिला अदालतों में नहीं होगी पैरवी, जानें क्यों हो रहा विरोध

दिल्ली में कल वकीलों की हड़ताल, सभी जिला अदालतों में नहीं होगी पैरवी; जानें क्यों हो रहा विरोध

दिल्ली की जिला अदालतों में 21 सितंबर को वकीलों की हड़ताल
ट्रैफिक चालान के नए नियमों के विरोध में दिल्ली के वकीलों का कार्य बहिष्कार

नई दिल्ली: दिल्ली की सभी जिला अदालतों में सोमवार, 21 सितंबर 2026 को वकील कामकाज का बहिष्कार करेंगे। इस दौरान अधिवक्ता न तो अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई में शामिल होंगे और न ही ऑनलाइन माध्यम से पैरवी करेंगे। जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने इस एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है।

वकीलों का विरोध ट्रैफिक चालान के निपटारे के नए नियमों को लेकर है। बार एसोसिएशनों का कहना है कि संशोधित नियमों के तहत चालान के निपटारे की प्रक्रिया में न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका कम होकर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका बढ़ रही है। वकीलों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और आम नागरिकों के लिए न्याय पाने के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।

21 सितंबर को क्या रहेगा बंद?

हड़ताल के दौरान दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकील अदालती कार्यवाही से दूर रहेंगे। इसका मतलब है कि अधिवक्ता नियमित मामलों में फिजिकल और वर्चुअल दोनों तरह की सुनवाई में पेश नहीं होंगे।

इसके अलावा वकीलों ने अदालत परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की भी घोषणा की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन सुबह 11:30 बजे से प्रस्तावित है।

इस फैसले से उन मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है जिनमें सोमवार को अधिवक्ताओं की मौजूदगी जरूरी थी। हालांकि, किसी मामले की अगली तारीख या सुनवाई की स्थिति संबंधित अदालत के आदेश और केस की प्रकृति पर निर्भर करेगी।


आखिर किस बात को लेकर है वकीलों की नाराजगी?

वकीलों की मुख्य आपत्ति केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 में बदलाव और दिल्ली में लागू किए जा रहे नए चालान निपटारा नियमों को लेकर है।

जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति का कहना है कि नए प्रावधानों से ट्रैफिक चालान के निपटारे में प्रशासनिक अधिकारियों को अधिक अधिकार मिल रहे हैं।

वकीलों के मुताबिक, पहले चालान से जुड़े विवादों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाने का रास्ता प्रमुख था, जबकि नए प्रावधानों में एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका बढ़ाई गई है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल

बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति का तर्क है कि चालान से संबंधित मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका को हटाकर प्रशासनिक अधिकारियों को अधिकार देना न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल खड़े करता है।

समिति के महासचिव नरवीर डबास के अनुसार, वकीलों को इस बात की चिंता है कि इससे नागरिकों के निष्पक्ष न्याय पाने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। यह बार एसोसिएशनों की आपत्ति और उनका पक्ष है; इसे सरकार या अदालत की ओर से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


50 फीसदी चालान राशि जमा करने का भी विरोध

वकीलों की आपत्ति का एक दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु चालान की 50 प्रतिशत राशि पहले जमा करने की शर्त है।

रिपोर्टों के अनुसार, यदि प्रशासनिक अधिकारी के स्तर पर चालान से जुड़ी अर्जी खारिज होने के बाद कोई व्यक्ति अदालत का रुख करना चाहता है, तो उसे चालान की 50 प्रतिशत रकम पहले जमा करनी पड़ सकती है।

वकीलों का कहना है कि इस तरह की शर्त आम नागरिक के लिए अदालत जाने की प्रक्रिया को आर्थिक रूप से कठिन बना सकती है।


45 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज करने का प्रावधान

वकीलों ने 45 दिन की समयसीमा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, नियम 167(5) के तहत चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करने की व्यवस्था है।

बार एसोसिएशनों का कहना है कि निर्धारित समय में आपत्ति दर्ज नहीं करने पर चालान स्वीकार माना जा सकता है। वकीलों का तर्क है कि ऐसे प्रावधानों से उन लोगों को परेशानी हो सकती है जो समयसीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज नहीं कर पाते।


सुबह 11:30 बजे होगा शांतिपूर्ण प्रदर्शन

हड़ताल केवल अदालतों में पैरवी से दूर रहने तक सीमित नहीं रहेगी। वकीलों ने सभी जिला अदालत परिसरों के बाहर सुबह 11:30 बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का कार्यक्रम भी रखा है।

बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने अपने सदस्यों से सोमवार को काम से विरत रहने की अपील की है।


दिल्ली की किन अदालतों पर पड़ेगा असर?

दिल्ली में जिला स्तर पर प्रमुख अदालत परिसरों में शामिल हैं:

  • तीस हजारी कोर्ट
  • कड़कड़डूमा कोर्ट
  • पटियाला हाउस कोर्ट
  • साकेत कोर्ट
  • रोहिणी कोर्ट
  • द्वारका कोर्ट
  • राउज एवेन्यू कोर्ट

इन जिला अदालतों में बड़ी संख्या में अधिवक्ता विभिन्न आपराधिक, दीवानी, पारिवारिक, मोटर वाहन और अन्य मामलों की पैरवी करते हैं। इसलिए एक दिन के कार्य बहिष्कार से सोमवार की निर्धारित न्यायिक कार्यवाही पर असर पड़ने की संभावना है।


वकीलों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने संकेत दिया है कि यदि सरकार नए चालान निपटारा नियमों पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो विरोध आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

समिति ने सरकार से संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और वकीलों की आपत्तियों पर विचार करने की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब?

सोमवार को जिन लोगों के मामलों में वकील के माध्यम से पैरवी होनी थी, उन्हें अपनी सुनवाई की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। हड़ताल के कारण अधिवक्ता पेश नहीं हो सकते हैं, लेकिन किसी मामले की सुनवाई स्थगित होगी या अगली तारीख मिलेगी, यह संबंधित अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।

इसलिए जिन लोगों की सोमवार को तारीख लगी है, उन्हें संबंधित अदालत, केस स्टेटस या अपने अधिवक्ता से नवीनतम जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।


📌 एक नजर में पूरी खबर

हड़ताल की तारीख: 21 सितंबर 2026, सोमवार
कहां: दिल्ली की सभी जिला अदालतें
क्या होगा: वकील कामकाज का बहिष्कार करेंगे
पैरवी: फिजिकल और ऑनलाइन सुनवाई में अधिवक्ता शामिल नहीं होंगे
प्रदर्शन: सुबह 11:30 बजे
मुख्य मुद्दा: ट्रैफिक चालान निपटारे के नए नियम
विरोध: प्रशासनिक अधिकारियों को चालान निपटाने का अधिकार, 50% राशि जमा करने की शर्त और संबंधित प्रक्रिया
आगे की चेतावनी: मांगों पर समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की बात

अब नजर इस पर

21 सितंबर की हड़ताल के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सरकार और दिल्ली की जिला अदालत बार एसोसिएशनों के बीच इन नए ट्रैफिक चालान नियमों को लेकर बातचीत आगे किस दिशा में जाती है। फिलहाल वकीलों ने एक दिन के कार्य बहिष्कार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है।

Md Asif Equbal
Md Asif Equbalhttps://avatarnews.in
Md Asif Equbal, Avatar News के पत्रकार और लेखक हैं। झारखंड, बिहार और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनहित से जुड़े समाचारों पर उनकी रिपोर्ट पढ़ें।
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