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Bihar News: क्या बख्तियारपुर का नाम होगा ‘नीतीशपुर’? मंत्री संतोष सुमन ने CM सम्राट चौधरी के सामने रखा प्रस्ताव, जानिए पूरा मामला

बख्तियारपुर का नाम नीतीशपुर करने के प्रस्ताव की खबर
बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ करने की मांग के बाद बिहार की राजनीति में चर्चा तेज।

पटना/बिहार: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक शहर के नाम को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राजधानी पटना से सटे बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने की मांग सामने आई है। बिहार सरकार के मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने यह प्रस्ताव रखने की बात कही है।

मंत्री संतोष सुमन का कहना है कि बख्तियारपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जन्मभूमि है। ऐसे में इस स्थान का नाम उनके नाम पर किया जाना उनके सार्वजनिक जीवन और बिहार के प्रति योगदान को सम्मान देने जैसा होगा। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि बख्तियारपुर का नाम अभी आधिकारिक तौर पर ‘नीतीशपुर’ नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल राज्य सरकार के सामने नाम बदलने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है।

आखिर ‘नीतीशपुर’ नाम का प्रस्ताव क्यों आया?

बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने 9 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग सामने रखी। उन्होंने कहा कि बख्तियारपुर को केवल भौगोलिक पहचान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह उस राजनीतिक नेता की जन्मभूमि है जिसने लंबे समय तक बिहार की राजनीति और शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संतोष सुमन के मुताबिक नीतीश कुमार की जीवन यात्रा, संघर्ष और उनसे जुड़ी अनेक स्मृतियां बख्तियारपुर की धरती से जुड़ी हुई हैं। इसलिए उनका सुझाव है कि इस शहर की पहचान को नीतीश कुमार के नाम से जोड़ा जाए और बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ रखा जाए।

मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने यह प्रस्ताव रखते हुए इसे नीतीश कुमार की जन्मभूमि को सम्मान देने से जोड़ा है।

CM सम्राट चौधरी ने क्या कहा?

नाम बदलने की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने साफ किया कि अभी सरकार के सामने बख्तियारपुर का नाम बदलने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग पहले भी अलग-अलग समय पर उठती रही है और उन्होंने भविष्य में नाम बदलने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया।

यानी फिलहाल स्थिति यह है कि ‘नीतीशपुर’ नाम को लेकर राजनीतिक स्तर पर मांग और चर्चा जरूर है, लेकिन सरकारी स्तर पर नाम परिवर्तन की अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

बख्तियारपुर ही क्यों? नीतीश कुमार से क्या है कनेक्शन?

बख्तियारपुर का नीतीश कुमार से सीधा व्यक्तिगत संबंध है। यह वही स्थान है जहां नीतीश कुमार का जन्म हुआ था और उनका बचपन भी इसी क्षेत्र से जुड़ा रहा है।

यही वजह है कि संतोष सुमन ने नाम परिवर्तन के लिए बख्तियारपुर को चुना है। उनका तर्क है कि किसी बड़े सार्वजनिक जीवन वाले नेता की जन्मभूमि को उनके नाम से पहचान मिलना सम्मान का प्रतीक हो सकता है।

हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि नीतीश कुमार स्वयं अतीत में बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग को लेकर अलग राय व्यक्त कर चुके हैं।

नीतीश कुमार खुद क्या कह चुके हैं?

बख्तियारपुर के नाम को बदलने की चर्चा पहले भी हुई थी। वर्ष 2021 में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा गया था कि क्या बख्तियारपुर का नाम उनके नाम पर किया जाना चाहिए, तो उन्होंने इस विचार को खारिज करते हुए कहा था कि उनका जन्मस्थान बख्तियारपुर है और नाम बदलने की जरूरत क्यों है।

इस पुराने बयान की वजह से मौजूदा ‘नीतीशपुर’ प्रस्ताव और भी चर्चा में आ गया है।

सिर्फ ‘नीतीशपुर’ ही नहीं, पहले भी आए हैं दूसरे नाम

बख्तियारपुर के नाम को बदलने की मांग नई नहीं है। अलग-अलग समय पर इस शहर के लिए दूसरे नामों की भी चर्चा होती रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, बख्तियारपुर नगर परिषद की ओर से पहले मुख्यमंत्री के सामने शहर का नाम ‘मगध द्वार’ रखने का प्रस्ताव भी रखा गया था। इसके पीछे मौजूदा नाम को ऐतिहासिक शासक बख्तियार खिलजी से जोड़कर देखने की दलील दी गई थी।

हालांकि इतिहासकारों के बीच इस बात पर मतभेद भी हैं कि बख्तियारपुर का नाम वास्तव में बख्तियार खिलजी के नाम पर ही पड़ा था या नहीं। इस संबंध में निर्णायक ऐतिहासिक प्रमाण को लेकर अलग-अलग मत मौजूद हैं।

‘नीतीशपुर’ नाम पर बिहार में सियासत तेज

मंत्री संतोष सुमन की मांग सामने आने के बाद यह मामला केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रहा। बिहार के अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।

आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए तंज कसा। उन्होंने नाम बदलने की राजनीति को लेकर सरकार पर निशाना साधा और रोजगार तथा जनता से जुड़े दूसरे मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही।

वहीं, सत्तारूढ़ खेमे के कुछ नेताओं की ओर से इस मांग के समर्थन में बयान भी सामने आए। जेडीयू नेता और मंत्री मदन सहनी ने भी बख्तियारपुर का नाम नीतीश कुमार के नाम पर किए जाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने नीतीश कुमार के बिहार के विकास और सामाजिक बदलाव में योगदान का हवाला दिया।

स्थानीय लोगों की राय भी अलग-अलग

नाम बदलने की चर्चा के बीच बख्तियारपुर के स्थानीय लोगों की राय भी सामने आई है। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुराने नाम को बदलना है तो बदला जा सकता है, लेकिन शहर का नाम किसी एक राजनीतिक व्यक्ति के नाम पर रखना जरूरी नहीं है।

स्थानीय स्तर पर यह तर्क भी सामने आया कि अगर नाम बदला जाए तो ऐसा नाम रखा जाए जो पूरे क्षेत्र की ऐतिहासिक या सांस्कृतिक पहचान को दर्शाए।

इससे साफ है कि ‘नीतीशपुर’ प्रस्ताव को लेकर सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी अलग-अलग राय मौजूद है।

क्या अब बख्तियारपुर का नाम सच में बदल जाएगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल इसका जवाब नहीं कहा जा सकता, क्योंकि अभी नाम परिवर्तन की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 सितंबर को कहा था कि राज्य सरकार के पास उस समय बख्तियारपुर का नाम बदलने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं था। इसलिए अभी ‘नीतीशपुर’ को बख्तियारपुर का आधिकारिक नाम कहना सही नहीं होगा।

अगर सरकार भविष्य में नाम बदलने का औपचारिक फैसला करती है तो उसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया और आधिकारिक अधिसूचना के जरिए नया नाम लागू किया जाएगा।

नाम बदलने की बहस में इतिहास भी बना बड़ा मुद्दा

बख्तियारपुर के नाम को लेकर होने वाली बहस में इतिहास का मुद्दा भी जुड़ गया है। कुछ राजनीतिक और सामाजिक समूह मौजूदा नाम को मध्यकालीन सैन्य कमांडर मुहम्मद बख्तियार खिलजी से जोड़ते हैं।

बख्तियार खिलजी का बिहार और बंगाल के इतिहास में महत्वपूर्ण लेकिन विवादित स्थान रहा है। उन्हें नालंदा और बिहार के अन्य बौद्ध शिक्षा केंद्रों पर हुए हमलों से जोड़ा जाता है। हालांकि बख्तियारपुर शहर का नाम उन्हीं के नाम पर पड़ा था या नहीं, इस बारे में इतिहासकारों में मतभेद हैं।

यही वजह है कि नाम परिवर्तन की मांग को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक पहचान से जुड़े सवाल के रूप में भी देखा जा रहा है।

अभी क्या है पूरा मामला?

फिलहाल तस्वीर को आसान भाषा में समझें तो मामला इस तरह है—

बख्तियारपुर का मौजूदा नाम: बख्तियारपुर
प्रस्तावित नया नाम: नीतीशपुर
प्रस्ताव रखने वाले: बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन
किसके सामने प्रस्ताव: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
प्रस्ताव का आधार: नीतीश कुमार की जन्मभूमि और उनके सार्वजनिक जीवन का सम्मान
सरकार का मौजूदा आधिकारिक फैसला: अभी नाम परिवर्तन की घोषणा नहीं
पहले का वैकल्पिक प्रस्ताव: ‘मगध द्वार’
राजनीतिक प्रतिक्रिया: सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं का समर्थन, विपक्ष की ओर से सवाल और आलोचना

आगे क्या होगा?

अब निगाहें बिहार सरकार पर हैं कि क्या ‘नीतीशपुर’ नाम को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाती है या नहीं। यदि सरकार इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है तो प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही नाम परिवर्तन संभव होगा।

फिलहाल इतना जरूर है कि बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ करने की मांग ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ समर्थक इसे नीतीश कुमार की जन्मभूमि को सम्मान देने का प्रस्ताव बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर विपक्ष और कुछ स्थानीय लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बख्तियारपुर का नाम बदलकर नीतीशपुर हो गया है। फिलहाल ‘नीतीशपुर’ एक प्रस्तावित नाम है, आधिकारिक नाम नहीं।

Md Asif Equbal
Md Asif Equbalhttps://avatarnews.in
Md Asif Equbal, Avatar News के पत्रकार और लेखक हैं। झारखंड, बिहार और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनहित से जुड़े समाचारों पर उनकी रिपोर्ट पढ़ें।
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