बसंतराय में प्रज्ञा केंद्रों की जांच पर BDO की सख्ती की सराहना, गलत दस्तावेज और अधिक राशि वसूली पर शिकायत की अपील
बसंतराय में प्रज्ञा केंद्रों की जांच को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। BDO श्रीमान मरांडी ने नियमों का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि गलत दस्तावेज या निर्धारित प्रक्रिया में गड़बड़ी मिलने पर जांच की जाएगी। अधिक राशि वसूली की शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई की बात कही गई है।







बसंतराय। प्रखंड क्षेत्र में संचालित प्रज्ञा केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन की ओर से की जा रही जांच को लेकर लोगों में चर्चा तेज हो गई है। प्रखंड विकास पदाधिकारी श्रीमान मरांडी के निर्देश और निगरानी में प्रज्ञा केंद्रों की जांच की जा रही है। खासकर SIR से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान सामने आ रही विसंगतियों को प्रशासन गंभीरता से देख रहा है।
प्रशासन की इस पहल को आम लोगों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि प्रज्ञा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में जाति, निवासी, आय सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं के लिए आम नागरिकों और सरकारी व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण माध्यम की भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण के बावजूद नियमों का पालन जरूरी
प्रखंड विकास पदाधिकारी श्रीमान मरांडी के अनुसार, प्रज्ञा केंद्र संचालकों को समय-समय पर प्रशिक्षण के माध्यम से यह जानकारी दी जाती है कि जाति, निवासी और आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदक से कौन-कौन से आवश्यक दस्तावेज लिए जाने हैं और आवेदन की प्रक्रिया किस तरह पूरी करनी है।
इसके बावजूद SIR के दौरान प्राप्त पावती और दस्तावेजों की जांच में कुछ ऐसे मामले सामने आने की बात कही गई है, जिनमें निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
BDO के अनुसार, कुछ मामलों में केवल आधार कार्ड की छायाप्रति के आधार पर पावती निकाले जाने की बात जांच में सामने आई है। जबकि केवल आधार कार्ड के आधार पर सभी प्रकार के प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा सकते। संबंधित प्रमाण पत्र के लिए निर्धारित दस्तावेज और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।







निवासी प्रमाण पत्र में खतियान और रसीद का सत्यापन महत्वपूर्ण
निवासी प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। प्रशासन के अनुसार, जहां खतियान, जमीन की रसीद अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहां संबंधित स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद ही आवेदन को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
बताया गया कि सामान्य प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित हल्का कर्मचारी स्तर से किया जाता है और इसके बाद प्रज्ञा केंद्र के माध्यम से आवेदन ऑनलाइन किया जाता है।
यदि बिना आवश्यक सत्यापन के केवल किसी एक दस्तावेज के आधार पर पावती निकाल दी जाती है, तो उससे आगे प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में समस्या उत्पन्न हो सकती है। यही वजह है कि प्रशासन अब ऐसे मामलों की जांच कर रहा है।
BDO की सख्ती को जनहित में महत्वपूर्ण कदम
प्रज्ञा केंद्रों की जांच को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी श्रीमान मरांडी की ओर से दिखाई जा रही सख्ती की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी प्रमाण पत्र बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में आवेदन की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होना जरूरी है।
यदि किसी आवेदक से गलत दस्तावेज के आधार पर आवेदन कराया जाता है या निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत काम किया जाता है, तो इसका असर सबसे पहले आम नागरिक पर पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन द्वारा दस्तावेजों की जांच और प्रज्ञा केंद्रों की कार्यप्रणाली की निगरानी करना व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







अधिक राशि लेने की शिकायत मिले तो होगी जांच
प्रखंड विकास पदाधिकारी ने यह भी बताया कि प्रज्ञा केंद्रों द्वारा निर्धारित राशि से अधिक पैसे लिए जाने को लेकर अभी तक प्रखंड कार्यालय में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई आवेदक लिखित रूप से शिकायत करता है कि उससे किसी सरकारी सेवा के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि ली गई है, तो उस शिकायत की जांच कराई जाएगी।
इसलिए यदि किसी आवेदक को लगता है कि उससे निर्धारित शुल्क से अधिक राशि ली गई है, बिना आवश्यक दस्तावेज के आवेदन कराया गया है या आवेदन की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है, तो वह चुप न रहे और प्रखंड कार्यालय में लिखित शिकायत दे।
प्रज्ञा केंद्र संचालकों से भी अपील
प्रशासन की ओर से प्रज्ञा केंद्र संचालकों से भी अपील है कि वे प्रत्येक आवेदन में निर्धारित नियमों का पालन करें। आवेदक से आवश्यक दस्तावेज लिए जाएं, जहां सत्यापन आवश्यक है वहां निर्धारित प्रक्रिया पूरी कराई जाए और उसके बाद ही आवेदन ऑनलाइन किया जाए।
सिर्फ पावती निकालने के लिए अधूरे दस्तावेजों के आधार पर आवेदन करने से भविष्य में आवेदक को परेशानी हो सकती है। साथ ही यदि जांच में जानबूझकर गलत या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आती है, तो मामले की गंभीरता के अनुसार संबंधित व्यक्ति या केंद्र के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
आवेदकों के लिए जरूरी सूचना
आवेदकों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। किसी भी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय यह जरूर पूछें कि कुल शुल्क कितना है, कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं और आवेदन किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
आवेदन की पावती जरूर लें और संभव हो तो भुगतान की रसीद भी अपने पास रखें। यदि किसी प्रज्ञा केंद्र पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगी जाती है, गलत दस्तावेज लगाने के लिए कहा जाता है, बिना सत्यापन आवेदन करने का दबाव बनाया जाता है या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित आवेदक प्रखंड कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकता है।
शिकायत करने से व्यवस्था होगी और मजबूत
प्रशासनिक कार्रवाई तभी प्रभावी हो सकती है जब आम लोग भी किसी अनियमितता की जानकारी सामने लाएं। इसलिए यदि किसी आवेदक के पास किसी प्रज्ञा केंद्र से संबंधित शिकायत है, तो वह नाम, तारीख, सेवा का प्रकार, ली गई राशि और उपलब्ध पावती/रसीद जैसे प्रमाणों के साथ प्रखंड कार्यालय में शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय ले सकता है।
बसंतराय में प्रज्ञा केंद्रों की जांच को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। BDO श्रीमान मरांडी द्वारा नियमों के पालन पर जोर देना और संदिग्ध दस्तावेजों की जांच कराना सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कदम है। हालांकि, किसी भी केंद्र या व्यक्ति के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
Avatar News की अपील: अगर आपके पास प्रज्ञा केंद्र से जुड़ी कोई वास्तविक शिकायत है, तो उसे बिना प्रमाण सोशल मीडिया पर फैलाने के बजाय पहले संबंधित प्रखंड कार्यालय में लिखित रूप से दें। शिकायत के साथ उपलब्ध पावती, रसीद या अन्य प्रमाण संलग्न करने से प्रशासन को मामले की जांच करने में आसानी होगी।
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