Sunday, 4 October 2026
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SC takes suo motu cognisance of 135-yr-old Central Secretariat Library space crunch

नई दिल्ली में 1891 में स्थापित Central Secretariat Library (CSL) एक बार फिर चर्चा में है। शास्त्री भवन के पुनर्विकास और Central Vista क्षेत्र में चल रही योजनाओं के बीच पुस्तकालय के स्थानांतरण को लेकर सवाल उठे हैं। पुस्तकालय में मौजूद विशाल ऐतिहासिक एवं सरकारी दस्तावेजों के संग्रह को सुरक्षित रखते हुए उसके लिए पर्याप्त और उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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अवतार न्यूज़ संवाददाता

नई दिल्ली: देश की प्रशासनिक और बौद्धिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों में शामिल Central Secretariat Library (CSL) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वर्ष 1891 में स्थापित इस पुस्तकालय ने एक सदी से भी अधिक समय के दौरान सरकारी कामकाज, शोध और ऐतिहासिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके संग्रह में बड़ी संख्या में पुस्तकें, सरकारी प्रकाशन, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री मौजूद है, जिनका ऐतिहासिक एवं शोध की दृष्टि से विशेष महत्व है।

हाल ही में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट में CSL के सामने उत्पन्न स्थान संबंधी चुनौती को प्रमुखता से उठाया गया। शास्त्री भवन के पुनर्विकास और Central Vista क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं के बीच पुस्तकालय को लेकर यह सवाल सामने आया कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण संग्रह को किस तरह सुरक्षित रखा जाएगा तथा उसके लिए पर्याप्त सुविधाओं वाला स्थान कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

1891 से ज्ञान और दस्तावेजों का महत्वपूर्ण केंद्र

Central Secretariat Library की स्थापना 1891 में हुई थी। लंबे समय से यह पुस्तकालय केंद्र सरकार के अधिकारियों, शोधकर्ताओं और अन्य पाठकों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ केंद्र के रूप में काम करता रहा है। समय के साथ इसके संग्रह का विस्तार होता गया और इसमें विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकें तथा सरकारी दस्तावेज जुड़ते गए।

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ऐसे में पुस्तकालय को केवल एक सामान्य लाइब्रेरी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसके संग्रह में मौजूद सामग्री देश के प्रशासनिक इतिहास और विभिन्न सरकारी नीतियों एवं गतिविधियों को समझने के लिए उपयोगी मानी जाती है। इसलिए स्थानांतरण की स्थिति में केवल पुस्तकों को दूसरी इमारत में ले जाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके संरक्षण, वर्गीकरण, डिजिटलीकरण और पाठकों के लिए सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा।

Central Vista परियोजना से जुड़ा क्या है मामला?

CSL के भविष्य को लेकर चर्चा उस समय और तेज हुई जब शास्त्री भवन तथा आसपास के क्षेत्र के पुनर्विकास से जुड़ी योजनाएं सामने आईं। रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई कि पुस्तकालय के लिए प्रस्तावित व्यवस्था उसके विशाल संग्रह और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप होगी या नहीं।

हालांकि, बाद में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि Central Vista के Kartavya Path redevelopment plan में Central Secretariat Library के लिए स्थान का प्रावधान किया गया है और इससे संबंधित निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में यह कहना कि पुस्तकालय को Central Vista परियोजना में बिल्कुल कोई स्थान नहीं दिया गया है, वर्तमान स्थिति की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।

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चुनौती सिर्फ जगह की नहीं, संरक्षण की भी

विशेषज्ञों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं है कि CSL को नई जगह कहां मिलेगी, बल्कि यह भी है कि वहां उसके ऐतिहासिक संग्रह को किस तरह संरक्षित किया जाएगा। पुरानी और दुर्लभ पुस्तकों तथा दस्तावेजों के संरक्षण के लिए नियंत्रित तापमान, आर्द्रता, सुरक्षा और आधुनिक रिकॉर्ड-प्रबंधन जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है।

इसके अलावा, इतने बड़े संग्रह को व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित करना भी एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है। प्रत्येक पुस्तक और दस्तावेज की पहचान, सूचीकरण, श्रेणीकरण तथा सुरक्षित पैकिंग के बाद उसे नए स्थान पर व्यवस्थित करना होगा। किसी भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के क्षतिग्रस्त होने या उसकी पहचान संबंधी जानकारी खोने से बचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को बेहद सावधानी से पूरा करना जरूरी होगा।

आधुनिक सुविधाओं के साथ डिजिटल संरक्षण पर भी जोर जरूरी

CSL के लिए नया स्थान तैयार होने के साथ-साथ डिजिटल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। महत्वपूर्ण पुस्तकों और दस्तावेजों का डिजिटलीकरण भविष्य में शोधकर्ताओं और पाठकों को इन सामग्रियों तक आसानी से पहुंच उपलब्ध करा सकता है।

यदि पुस्तकालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाता है, तो यह केवल मौजूदा संग्रह को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की प्रशासनिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो सकता है।

एक ऐतिहासिक संस्थान के भविष्य पर टिकी नजरें

1891 से अब तक का सफर तय कर चुकी Central Secretariat Library देश के पुराने संस्थागत पुस्तकालयों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। Central Vista और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के बीच इसके भविष्य को लेकर उठी चर्चा ने एक बड़े सवाल को सामने ला दिया है—विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

अब नजर इस बात पर है कि CSL के लिए तैयार की जा रही नई व्यवस्था उसके विशाल संग्रह, शोध की जरूरतों और संरक्षण मानकों को किस हद तक पूरा करती है। यदि पुस्तकालय को पर्याप्त स्थान, आधुनिक संरक्षण सुविधाएं और बेहतर डिजिटल व्यवस्था मिलती है, तो पुनर्विकास की यह प्रक्रिया इस ऐतिहासिक संस्थान को नई मज​बूती देने का अवसर भी बन सकती है।

Md Asif Equbal

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