गोड्डा से इस वक्त की बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। पथरगामा प्रखंड क्षेत्र के परसपानी स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग की ओर से कॉलेज में 63 बीएचएमएस सीटों पर इंटेक का उल्लेख किया गया है। आयोग के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद कॉलेज के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। परसपानी का राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज गोड्डा ही…
गोड्डा के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को बड़ी राहत, 63 BHMS सीटों पर 2026-27 सत्र में दाखिले का रास्ता साफ
गोड्डा से इस वक्त की बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। पथरगामा प्रखंड क्षेत्र के परसपानी स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग की ओर से कॉलेज में 63 बीएचएमएस सीटों पर इंटेक का उल्लेख किया गया है। आयोग के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद कॉलेज के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है।
परसपानी का राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज गोड्डा ही नहीं, बल्कि पूरे संताल परगना क्षेत्र के लिए चिकित्सा शिक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संस्थान माना जाता है। ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह कॉलेज लंबे समय से होम्योपैथिक चिकित्सा शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है। इस संस्थान से विद्यार्थियों को बीएचएमएस यानी बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई करने का अवसर मिलता है।
लेकिन पिछले कुछ समय से कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षण स्टाफ, आधारभूत संरचना और निर्धारित मानकों से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आती रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े मानकों को पूरा करना कॉलेज के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। खासकर शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को लेकर स्थिति को बेहतर करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।
इन परिस्थितियों के बीच कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच भविष्य को लेकर चिंता भी बनी हुई थी। विद्यार्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि सीटों को लेकर किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।
इसी बीच राज्य सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और कॉलेज की समस्याओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के समक्ष लगातार अपनी बात रखी।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मामले को लेकर लगातार पैरवी की। स्वास्थ्य मंत्री ने दिल्ली जाकर राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अधिकारियों से कई बार मुलाकात की और परसपानी स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की स्थिति तथा विद्यार्थियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
स्वास्थ्य मंत्री की ओर से आयोग को यह जानकारी दी गई कि राज्य सरकार कॉलेज की कमियों को दूर करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि कॉलेज में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
कॉलेज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक शिक्षण स्टाफ की कमी को दूर करना है। इसके लिए राज्य सरकार ने 53 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार का उद्देश्य है कि कॉलेज में आवश्यक संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक व्यवस्था मिल सके।
सिर्फ शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि कॉलेज की आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सुविधाओं को भी राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का भरोसा आयोग के समक्ष दिया गया है।
सरकार की ओर से आयोग को यह भरोसा दिलाया गया है कि कॉलेज में जो भी कमियां हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ संस्थान को मजबूत बनाने पर भी काम किया जाएगा।
और अब इसी पूरी कवायद के बीच राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 63 बीएचएमएस सीटों पर इंटेक का उल्लेख किया गया है।
यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कॉलेज में बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहे और नए सत्र में प्रवेश की उम्मीद रखने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है।
63 सीटों का यह निर्णय केवल सीटों की संख्या से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसके साथ सैकड़ों विद्यार्थियों और उनके परिवारों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए अपने ही क्षेत्र में बीएचएमएस की पढ़ाई का अवसर बेहद महत्वपूर्ण है।
गोड्डा और संताल परगना के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अनेक परिवारों के लिए उच्च चिकित्सा शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाना आसान नहीं होता। ऐसे में परसपानी स्थित यह सरकारी मेडिकल कॉलेज विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा हासिल करने का अवसर देता है।
यही वजह है कि कॉलेज से जुड़ा कोई भी फैसला केवल संस्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के इस निर्णय के बाद अब विद्यार्थियों को उम्मीद है कि कॉलेज में शैक्षणिक व्यवस्था और बेहतर होगी। शिक्षकों की नियुक्ति पूरी होने के बाद कक्षाओं के संचालन और अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों की ओर से भी सरकार के इस प्रयास को सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। खासकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा दिल्ली जाकर आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करने और कॉलेज की समस्याओं को लगातार उठाने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होने दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए कॉलेज को आवश्यक मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
दरअसल, किसी भी मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए केवल सीटों की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं होती। गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षक, प्रयोगशालाएं, आवश्यक शैक्षणिक संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और निर्धारित मानकों का पालन भी जरूरी होता है।
परसपानी के इस कॉलेज के सामने भी यही चुनौती रही है कि संस्थान को लगातार बेहतर बनाते हुए राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए। सरकार की ओर से अब इसी दिशा में कदम बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है।
53 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी होती है और कॉलेज की अन्य आवश्यक कमियों को भी दूर किया जाता है, तो आने वाले समय में संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था और मजबूत हो सकती है।
इसका सीधा फायदा यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा। बेहतर शिक्षक, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और मजबूत आधारभूत संरचना विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
इसके अलावा, इस कॉलेज का मजबूत होना गोड्डा जिले के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी। जिले में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होने से स्थानीय युवाओं को मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और भविष्य में यहां से प्रशिक्षित होने वाले चिकित्सक ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में योगदान दे सकेंगे।
परसपानी स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और उच्च शिक्षा के विस्तार की जरूरत महसूस करता रहा है।
ऐसे में 2026-27 के लिए 63 बीएचएमएस सीटों पर इंटेक का उल्लेख कॉलेज के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
अब आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आयोग के समक्ष सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है। 53 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया कब पूरी होती है, कॉलेज की आधारभूत संरचना में कितना सुधार होता है और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाएं कब तक मिलती हैं—इन सभी बिंदुओं पर लोगों की नजर रहेगी।
फिलहाल आयोग के निर्णय ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को बड़ी राहत दी है।
एक तरफ जहां 63 बीएचएमएस सीटों को लेकर राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा शिक्षण स्टाफ की कमी दूर करने के लिए 53 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही कॉलेज की आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का भरोसा भी दिया गया है।
यानी कुल मिलाकर परसपानी स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के लिए यह समय एक नई उम्मीद लेकर आया है।
गोड्डा के इस महत्वपूर्ण संस्थान को मजबूत करने की दिशा में यदि सरकार की पहल आगे भी इसी तरह जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह कॉलेज संताल परगना क्षेत्र में होम्योपैथिक चिकित्सा शिक्षा का एक मजबूत केंद्र बन सकता है।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के निर्णय के बाद कॉलेज के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में खुशी का माहौल है और अब सभी की उम्मीदें कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षकों की नियुक्ति और आधारभूत सुविधाओं में होने वाले सुधार पर टिकी हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी खबर यही है कि परसपानी स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 63 बीएचएमएस सीटों पर बड़ी राहत मिली है और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के आदेश के बाद विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर बनी चिंता काफी हद तक दूर होती नजर आ रही है।
Discover more from अवतार न्यूज
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
अपनी राय साझा करें