ताजा घटनाक्रम की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर अमेरिकी हमले से हुई। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान के लारक द्वीप पर मौजूद दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन लॉन्चरों से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की जा रही थी, जो इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन सकती थीं।अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला किया।…
अमेरिका ने ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर किया हमला, ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार
ताजा घटनाक्रम की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर अमेरिकी हमले से हुई। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान के लारक द्वीप पर मौजूद दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन लॉन्चरों से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की जा रही थी, जो इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन सकती थीं।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला किया। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और इनका लक्ष्य जॉर्डन के किंग हुसैन और अल-अज्रक एयर बेस से जुड़े अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे।
हालांकि, जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को intercept कर लिया। शुरुआती रिपोर्टों में अमेरिकी ठिकानों को बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
यानी अमेरिका के हमले के बाद ईरान का जवाब सीधे अमेरिका के साथ-साथ उसके क्षेत्रीय सैन्य नेटवर्क तक पहुंच गया है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि संघर्ष अगर आगे बढ़ा, तो इसकी चपेट में पश्चिम एशिया के दूसरे देश भी आ सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है। ताजा घटनाक्रम के बाद तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरानी ड्रोन को अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के ऊपर intercept करने की जानकारी दी है। इससे साफ है कि तनाव सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आसपास के देश भी हाई अलर्ट पर हैं।
सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि क्या यह जवाबी कार्रवाई यहीं रुकती है या फिर अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का नया सिलसिला शुरू होता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पश्चिम एशिया पर टिकी हुई है। क्योंकि यहां होने वाला अगला सैन्य कदम न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा, बल्कि तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
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