बिश्केक/नई दिल्ली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्ध और शांति, ऊर्जा, व्यापार तथा बहुपक्षीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में आयोजित किया…
SCO Summit 2026: मोदी-पुतिन की मुलाकात, साथ कार में सफर; ईरानी राष्ट्रपति से भी अहम बातचीत
बिश्केक/नई दिल्ली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्ध और शांति, ऊर्जा, व्यापार तथा बहुपक्षीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत वर्ष 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और इस मंच पर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहा है।
मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह वर्ष 2026 में दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
बैठक में भारत और रूस के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, मोबिलिटी और लोगों के बीच संपर्क समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने 24 अगस्त 2026 को मॉस्को में हुई भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के परिणामों का भी स्वागत किया।
यूक्रेन युद्ध पर मोदी का शांति संदेश
मोदी-पुतिन बातचीत का एक महत्वपूर्ण पहलू यूक्रेन युद्ध भी रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। Reuters के अनुसार, मोदी ने पुतिन से कहा कि दुनिया को लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से निकलकर युद्ध की समाप्ति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और भारत सभी शांति प्रयासों का समर्थन करता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी पुष्टि की कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर विचार साझा किए। इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है।
‘कारपूल डिप्लोमेसी’ ने खींचा सबका ध्यान
मोदी-पुतिन बैठक के बाद दोनों नेताओं का एक ही कार में साथ सफर करना भी चर्चा का विषय बन गया। दोनों नेताओं ने बातचीत के बाद कार में साथ यात्रा की। इसे अनौपचारिक कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है और मीडिया में इसे ‘कारपूल डिप्लोमेसी’ कहा जा रहा है।
हालांकि, इस कार यात्रा को किसी औपचारिक समझौते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका महत्व मुख्य रूप से दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद और भारत-रूस के मजबूत रणनीतिक रिश्तों के प्रतीक के तौर पर सामने आया है।
भारत-रूस रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर
भारत और रूस के बीच लंबे समय से विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। बैठक में दोनों देशों ने इस साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, उर्वरक, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण आधार हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत-रूस संबंधों में मजबूती और निरंतरता बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन, जो 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित होना है, में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात
SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
बैठक ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा स्थिति अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत के उस रुख को दोहराया कि विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।
समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जोर
ईरानी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री मार्गों और व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री नाविकों को किसी भी परिस्थिति में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
भारत के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया की अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर पड़ सकता है।
BRICS और SCO में भारत-ईरान सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने बहुपक्षीय संगठनों में भारत और ईरान के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दोनों देशों के बीच SCO और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन को भी भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में आने का निमंत्रण दिया।
SCO में भारत की प्राथमिकताएं क्या हैं?
SCO भारत के लिए मध्य एशिया, रूस, चीन और अन्य सदस्य देशों के साथ संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। इस सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर प्रमुख हैं।
SCO का गठन वर्ष 2001 में हुआ था। आज यह क्षेत्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच बन चुका है। भारत के लिए इस संगठन के जरिए आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर व्यापार, संपर्क, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत का अवसर मिलता है।
बिश्केक में कई देशों के नेता मौजूद
SCO सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के शीर्ष नेता बिश्केक में मौजूद हैं। सम्मेलन के दौरान नेताओं के बीच औपचारिक बैठकों के साथ-साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातों का दौर भी चल रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO सम्मेलन से पहले किर्गिस्तान में महात्मा गांधी की स्मृति में पुष्पांजलि अर्पित की और भारतीय समुदाय से भी संवाद किया।
भारत की कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण दौरा
बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी की बैठकों को भारत की बहुपक्षीय और संतुलित कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर बातचीत हुई, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा हुई।
मोदी-पुतिन की मुलाकात और उसके बाद दोनों नेताओं का साथ कार में सफर करना इस दौरे की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गया है। वहीं ईरानी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में भारत ने शांति, संवाद, समुद्री सुरक्षा और व्यापार की निरंतरता पर अपना रुख स्पष्ट किया।
कुल मिलाकर, बिश्केक SCO सम्मेलन भारत के लिए केवल बहुपक्षीय बैठक नहीं बल्कि रूस, ईरान और अन्य प्रमुख देशों के साथ रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया है।
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