उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार काम कर रही है। निवेश प्रस्तावों के त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के प्रति निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह उत्साहजनक है कि प्रदेश के युवा पारंपरिक और पुश्तैनी व्यवसायों से आगे बढ़कर…
UP में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बढ़ा निवेश, युवाओं और महिला उद्यमियों को मिल रहे नए अवसर
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार काम कर रही है। निवेश प्रस्तावों के त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के प्रति निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह उत्साहजनक है कि प्रदेश के युवा पारंपरिक और पुश्तैनी व्यवसायों से आगे बढ़कर आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। वहीं महिला उद्यमी भी इस क्षेत्र में बढ़-चढ़कर निवेश कर रही हैं, जो प्रदेश में उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण के लिए सकारात्मक संकेत है।
अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग उत्तर प्रदेश शासन बी. एल. मीणा ने बताया कि उप मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश का रुझान तेजी से बढ़ा है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के माध्यम से 579 इकाइयों की स्थापना की गई है, जिनकी प्रति इकाई औसत लागत लगभग 4 करोड़ रुपये बताई गई है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े विशेष हब और इकाइयां विकसित की गई हैं। रामपुर और बरेली में फल एवं सब्जी प्रोसेसिंग, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर में बिस्कुट एवं नमकीन उद्योग, बाराबंकी में रेडी-टू-ईट फल एवं सब्जी प्लांट, अमेठी में पशु आहार उत्पादन, उन्नाव में मुर्गी दाना तथा देवरिया में मछली के फ्लोटिंग फीड उत्पादन की इकाइयां स्थापित की गई हैं।
इन प्रयासों से प्रदेश में करीब 15 हजार करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिला है। उल्लेखनीय है कि विदेशों में कार्यरत उत्तर प्रदेश के लगभग 200 युवाओं ने वापस आकर प्रदेश में अपने उद्यम स्थापित किए हैं। इसके अलावा उत्तराखंड, बिहार, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों के उद्यमियों ने भी उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए हैं।
प्रदेश के 4 लाख से अधिक किसानों के कृषि उत्पादों की खरीद कर उन्हें विभिन्न प्रसंस्करण इकाइयों में मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जा रहा है। इनमें अचार, जूस, मैकरोनी, पास्ता, रेडी-टू-ईट फूड, फल एवं शहद से बने उत्पाद, मूंगफली और गुड़ के उत्पाद, आइसक्रीम, मसाले, हल्दी, हींग, प्रोटीन एवं सब्जी उत्पाद, मेंथा ऑयल और ब्रान ऑयल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हुआ है।
प्रदेश से बिस्कुट, फलों का पल्प, सब्जी उत्पाद, शहद उत्पाद और चिकोरी सहित अन्य खाद्य उत्पादों का जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, खाड़ी देशों और अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात बढ़ा है। खाद्य उत्पादों के निर्यात में करीब 5,000 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने देश में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विश्वास जताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में निवेश, औद्योगिक विकास, कृषि मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश के अग्रणी खाद्य प्रसंस्करण राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।
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