झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। जेपीएससी यानी झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, झारखंड सरकार, जेपीएससी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब राज्य में JPSC और JSSC…
JPSC परीक्षा विवाद: CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, केंद्र-झारखंड सरकार को नोटिस
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। जेपीएससी यानी झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, झारखंड सरकार, जेपीएससी और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब राज्य में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
आखिर मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 से जुड़ी है, जो JPSC द्वारा विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी। याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की व्यापक और निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसी को लेकर CBI से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। एक विकल्प के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग भी सामने आई है। हालांकि, मुख्य मांग केवल आरोपों के आधार पर परीक्षा को रद्द करना नहीं, बल्कि पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने किन्हें भेजा नोटिस?
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहाना भी शामिल थे। अदालत ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग, CBI और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
परीक्षा रद्द करने की नहीं, जांच की प्रमुख मांग
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि याचिका का मुख्य उद्देश्य केवल परीक्षा रद्द कराना नहीं है। याचिका में कहा गया है कि महज आरोप या विरोध प्रदर्शन के आधार पर किसी परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं होगा। इसलिए पहले वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ तरीके से जांच होनी चाहिए, ताकि यह तय किया जा सके कि कथित अनियमितताएं वास्तव में हुईं या नहीं और यदि हुईं तो उनका परीक्षा परिणाम पर कितना प्रभाव पड़ा।
याचिका में परीक्षा प्रक्रिया के हर महत्वपूर्ण चरण की जांच की मांग की गई है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी प्रिंटिंग, भंडारण, परिवहन और वितरण तक की प्रक्रिया शामिल है। इसके साथ ही परीक्षा संचालन, OMR शीटों की सुरक्षा, स्कैनिंग, कोडिंग-डिकोडिंग, मूल्यांकन, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
इतना ही नहीं, OMR की मूल और अभ्यर्थियों के पास मौजूद कार्बन कॉपी, CCTV फुटेज तथा सर्वर और डिजिटल ऑडिट लॉग जैसे सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ न हो सके।
JPSC और JSSC को लेकर क्यों बढ़ा छात्रों का आंदोलन?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ समय से JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थी लगातार सवाल उठा रहे हैं। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
इन मुद्दों को लेकर रांची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। छात्र लंबे समय तक आंदोलनरत रहे और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते रहे। आंदोलन का केंद्र केवल किसी एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता रही है।
कई भर्ती परीक्षाओं पर पहले भी हुई कार्रवाई
भर्ती विवाद के बीच हाल ही में झारखंड सरकार ने JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़े फैसले किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कई परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए CID जांच का आदेश दिया है। इन फैसलों के बाद भी अभ्यर्थियों के बीच आंदोलन और असंतोष देखने को मिला, क्योंकि बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों का भविष्य भी प्रभावित हुआ है।
यही वजह है कि अब पूरा विवाद केवल परीक्षा रद्द करने या परिणाम जारी करने तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ अभ्यर्थी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों के सामने अपने भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर झारखंड हाईकोर्ट में भी अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में JPSC प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी याचिका पर नोटिस जारी होना इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बना देता है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने कथित आरोपों को सही मान लिया है। नोटिस जारी करना फिलहाल संबंधित पक्षों से जवाब और अपना पक्ष रखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों, जांच और पक्षकारों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
आगे क्या होगा?
अब केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं और भर्ती परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर किस प्रकार की कार्रवाई उचित होगी।
इस मामले पर पूरे झारखंड के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों की नजर टिकी हुई है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आगे का फैसला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि झारखंड की भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद JPSC और JSSC भर्ती विवाद की निष्पक्ष जांच होगी? क्या अभ्यर्थियों की पारदर्शिता की मांग पूरी होगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या झारखंड की भर्ती परीक्षा प्रणाली में ऐसा सुधार होगा जिससे भविष्य में युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हो सके?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें अब अदालत की अगली सुनवाई और सरकारों के जवाब पर टिकी हैं।
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