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रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में दोषी करार दी गई मां को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने मामले में दायर महिला की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने मामले में प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी का बारीकी से परीक्षण किया और माना कि उपलब्ध साक्ष्य महिला की संलिप्तता की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करते हैं।
मामले में मृत दोनों बच्चों की उम्र घटना के समय महज चार और दो वर्ष थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को एक साथ देखने पर घटनाक्रम की ऐसी पूरी श्रृंखला सामने आती है, जो आरोपी महिला की भूमिका को स्पष्ट करती है। कोर्ट के अनुसार, साक्ष्यों की कड़ी में ऐसा कोई महत्वपूर्ण तथ्य या विरोधाभास सामने नहीं आया, जिसके आधार पर हत्या के लिए किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की संभावना मानी जा सके। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि तभी उचित होती है, जब सभी परिस्थितियां एक-दूसरे से जुड़कर आरोपी के अपराध की ओर ही संकेत करें और किसी वैकल्पिक संभावना के लिए पर्याप्त गुंजाइश न बचे।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2021 में महिला को दोनों बच्चों की हत्या का दोषी ठहराया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ महिला ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों, घटनाक्रम और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया। इसके बाद खंडपीठ ने महिला की अपील को खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। अदालत के इस फैसले के बाद दो मासूम बच्चों की हत्या के मामले में दोषी मां की सजा पर फिलहाल कानूनी मुहर बरकरार है।
