बसंतराय प्रखंड के राहा पंचायत में नवनिर्मित सड़क पर जलजमाव से आवागमन में परेशानी, ग्रामीणों ने गुणवत्ता जांच की मांग की। बसंतराय/गोड्डा। बसंतराय प्रखंड क्षेत्र के राहा पंचायत अंतर्गत कोरियाना चौक से राहा होते हुए लोचनी डेरमा मोड़ तक निर्माणाधीन सड़क इन दिनों ग्रामीणों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है, जिसके कारण कई स्थानों पर गंभीर
संवेदक की कथित मनमानी से नवनिर्मित सड़क बनी झील, राहा पंचायत में जलजमाव से ग्रामीण परेशान
जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालात ऐसे हैं कि बारिश होने के बाद सड़क के कुछ हिस्सों में पानी जमा हो जाता है और लंबे समय तक निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों, वाहन चालकों और आसपास रहने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में संवेदक की कथित मनमानी और विभागीय निगरानी में कमी का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, कोरियाना चौक के समीप से डेरमा की दिशा में सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत 16 मार्च 2025 को हुई थी। सड़क निर्माण शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि लंबे समय से आवागमन में हो रही परेशानी दूर होगी और क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सड़क बनने के बाद गांवों के बीच आवागमन सुगम होगा, बच्चों को स्कूल जाने में आसानी होगी और मरीजों सहित आम लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद सामने आ रही समस्याओं ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि सड़क का निर्माण तो किया गया, लेकिन कई स्थानों पर सड़क की ऊंचाई और ढलान इस प्रकार नहीं रखी गई कि बारिश या अन्य स्रोतों से आने वाला पानी आसानी से बाहर निकल सके। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई जगह सड़क पर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान सही तरीके से लेवलिंग और ड्रेनेज की व्यवस्था की जाती तो आज सड़क पर इस तरह पानी जमा होने की समस्या नहीं होती। राहा गांव में स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व मुखिया स्वर्गीय अब्दुल करीम के घर के आसपास सड़क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में सबसे अधिक नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में सड़क के कई हिस्सों में गड्ढानुमा स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण बारिश का पानी जमा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के दोनों तरफ ढलाई किए जाने के बावजूद बीच का हिस्सा कई स्थानों पर नीचे होने के कारण पानी निकलने के बजाय सड़क पर ही ठहर जाता है। इससे सड़क का हिस्सा पानी और कीचड़ से भर जाता है तथा पैदल चलने वाले लोगों को भी भारी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल बरसात के कुछ दिनों तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। लगातार जलजमाव की वजह से आसपास की जमीन और घरों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण लोगों की सुविधा के लिए कराया जा रहा है, लेकिन यदि सड़क बनने के बाद भी लोगों को पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़े तो निर्माण कार्य की योजना और गुणवत्ता दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रमोद पासवान एवं मोहम्मद आलमगीर के घर के समीप भी जलजमाव की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क के आसपास लगातार पानी जमा रहने से वहां रहने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो लगातार पानी जमा रहने से आसपास के मकानों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से मोहम्मद आलमगीर एवं मोहम्मद कलीमुद्दीन के घरों के आसपास की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी था। जिस स्थान पर पहले से पानी जमा होने की संभावना थी, वहां सड़क की ऊंचाई बढ़ाने और पानी की निकासी के लिए नाली या अन्य उपयुक्त व्यवस्था की जानी चाहिए थी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब सड़क निर्माण के बाद जलजमाव की समस्या सामने आने पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर निर्माण से पहले क्षेत्र का तकनीकी सर्वे किस प्रकार किया गया था। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान संबंधित अभियंताओं की नियमित मौजूदगी और तकनीकी निरीक्षण पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य की नियमित निगरानी की जाती और हर चरण में सड़क की गुणवत्ता, ऊंचाई और ढलान की जांच की जाती, तो निर्माण के दौरान ही इन खामियों को दूर किया जा सकता था। लोगों का आरोप है कि विभागीय निगरानी में कमी का फायदा उठाकर संवेदक द्वारा कथित तौर पर अपनी सुविधा के अनुसार कार्य कराया गया। हालांकि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित संवेदक और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में केवल ऊपर से ढलाई कर देना पर्याप्त नहीं है। सड़क की मजबूती के साथ-साथ उसकी डिजाइन, ऊंचाई और जल निकासी व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि सड़क पर पानी लगातार जमा रहेगा तो इससे न केवल आवागमन बाधित होगा, बल्कि भविष्य में सड़क की स्थिति भी खराब हो सकती है। सड़क किनारे बने गहरे गड्ढों ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर सड़क के किनारे गहराई अधिक होने के कारण वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। खासकर बारिश के दौरान जब सड़क पर पानी और कीचड़ जमा रहता है, तब वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई बाइक सवार या चारपहिया वाहन चालक जरा सा भी सड़क के किनारे चला जाए तो वाहन गड्ढे में फंस सकता है या दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि सड़क किनारे बने गड्ढों और जलजमाव की समस्या को जल्द दूर नहीं किया गया तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण सुरक्षित और सुगम आवागमन के लिए कराया जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में कई स्थानों पर सड़क खुद लोगों के लिए खतरा बनती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक सुधार कार्य कराया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर प्रखंड प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक कई बार पहुंचाई जा चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, समस्या के समाधान को लेकर कई स्तरों पर बात की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन मिलने से समस्या समाप्त नहीं होगी, बल्कि सड़क की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए मौके पर वास्तविक सुधार कार्य करना होगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि कोरियाना चौक से राहा होते हुए लोचनी डेरमा मोड़ तक हो रहे सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं, सड़क की ऊंचाई और ढलान सही है या नहीं तथा निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। ग्रामीणों ने विशेष रूप से मांग की है कि जिन स्थानों पर लगातार जलजमाव हो रहा है, वहां तत्काल निरीक्षण कर सड़क की ऊंचाई आवश्यकतानुसार बढ़ाई जाए। इसके साथ ही पानी की निकासी के लिए नाली अथवा अन्य उचित ड्रेनेज व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश का पानी सड़क पर जमा न हो। सड़क किनारे बने गहरे गड्ढों को भरकर सुरक्षित बनाया जाए और जहां निर्माण कार्य में तकनीकी खामी पाई जाए, वहां जिम्मेदार एजेंसी से सुधार कार्य कराया जाए। इस पूरे मामले ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया गया? सड़क की ऊंचाई और ढलान का तकनीकी निरीक्षण किस स्तर पर हुआ? निर्माण कार्य के दौरान संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा कितनी बार मौके का निरीक्षण किया गया? और यदि निर्माण कार्य में किसी स्तर पर तकनीकी खामी या लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। सड़क निर्माण का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधा देना है, लेकिन यदि निर्माण के बाद ही सड़क पर जलजमाव होने लगे और लोगों के घरों तथा सुरक्षित आवागमन पर खतरा उत्पन्न होने लगे, तो पूरे निर्माण कार्य की समीक्षा जरूरी हो जाती है। अब ग्रामीणों की निगाह जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरीय अधिकारियों पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए जलजमाव वाले स्थानों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराएंगे। ग्रामीणों की मांग है कि केवल कागजी जांच के बजाय अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें और जहां भी तकनीकी खामी हो, वहां तत्काल सुधार कार्य सुनिश्चित कराया जाए। फिलहाल, राहा पंचायत के ग्रामीण एक ही सवाल उठा रहे हैं कि जिस सड़क को उनकी सुविधा और सुरक्षित आवागमन के लिए बनाया जा रहा है, वह आखिर जलजमाव और कीचड़ की समस्या से कब मुक्त होगी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पानी जमा रहने की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए और यदि निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती गई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है।
अपनी राय साझा करें