धनकुनाथ मंदिर से लापता 3 वर्षीय रणवीर 72 घंटे बाद सकुशल मिला, परिवार और गांव में खुशी की लहर

धोरैया | संवाददाता
धोरैया: थाना क्षेत्र के अस्सी गांव से तीन दिन पहले लापता हुआ तीन वर्षीय मासूम रणवीर कुमार आखिरकार 72 घंटे बाद सकुशल मिल गया। बच्चे की सुरक्षित वापसी की खबर मिलते ही परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, वहीं पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई और “बाबा धनकुनाथ की जय” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
बताया जाता है कि अस्सी गांव निवासी गौतम यादव की पत्नी रुक्मिणी देवी अपने परिवार की अन्य महिलाओं के साथ प्रसिद्ध धनकुनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने गई थीं। इसी दौरान उनका तीन वर्षीय पुत्र रणवीर कुमार अचानक भीड़ में कहीं गुम हो गया। पहले तो परिजनों ने मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में काफी देर तक बच्चे की तलाश की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो परिवार की चिंता बढ़ गई।
घटना की सूचना तुरंत धनकुनाथ मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय थाना को दी गई। परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराते हुए बच्चे की तलाश शुरू कर दी। इसके बाद परिवार ने वाहन आरक्षित कर आसपास के गांवों, बाजारों और संभावित स्थानों पर लगातार खोजबीन की। बच्चे की तस्वीर और जानकारी समाचार पत्रों, मीडिया चैनलों तथा सोशल मीडिया पर भी साझा की गई ताकि जल्द से जल्द उसका पता लगाया जा सके।
तीन दिनों तक परिजन दिन-रात रणवीर की तलाश में दर-दर भटकते रहे। हर गुजरते घंटे के साथ परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। गांव के लोग भी लगातार बच्चे के सकुशल मिलने की दुआ कर रहे थे।
इसी बीच गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे भागलपुर कचहरी परिसर में एक अज्ञात व्यक्ति तीन वर्षीय रणवीर को छोड़कर वहां से चला गया। कचहरी परिसर में बच्चे के मिलने की सूचना तेजी से फैल गई। संयोगवश उसी समय अस्सी गांव निवासी तथा संजय झा के ससुर रत्नेश्वर मिश्र किसी कार्य से कचहरी पहुंचे हुए थे। जब उन्हें बच्चे के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत अपने दामाद संजय झा को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही संजय झा बिना देर किए गौतम यादव के घर पहुंचे और परिवार को रणवीर के सकुशल मिलने की खुशखबरी दी। यह खबर सुनते ही घर में मातम का माहौल पलभर में खुशी में बदल गया। परिवार के सदस्य भावुक हो उठे और भगवान का धन्यवाद करने लगे।
इसके बाद करीब 20 मोटरसाइकिलों पर सवार होकर ग्रामीण और परिजन भागलपुर कचहरी पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रणवीर कुमार को सकुशल अपने साथ गांव लेकर आए। गांव में बच्चे के पहुंचते ही उसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मासूम को सुरक्षित देखकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। महिलाओं ने भगवान बाबा धनकुनाथ का आभार व्यक्त किया, जबकि ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर इस खुशी का जश्न मनाया।
इस पूरे घटनाक्रम में धोरैया प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं धनकुंड थाना प्रभारी सूरज कुमार की भूमिका भी सराहनीय रही। दोनों अधिकारियों ने बच्चे की खोजबीन के प्रयासों की लगातार निगरानी की और विभिन्न स्तरों पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया। रणवीर के सकुशल मिलने पर उन्होंने परिवार को बधाई देते हुए राहत व्यक्त की।
रणवीर की सुरक्षित वापसी से केवल उसका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा अस्सी गांव राहत और खुशी से झूम उठा। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिनों की चिंता, बेचैनी और लगातार की गई प्रार्थनाओं के बाद बच्चे का सकुशल मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लोगों ने इसे बाबा धनकुनाथ की कृपा और आशीर्वाद बताया तथा भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास व्यक्त किया।
मासूम रणवीर की घर वापसी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। परिवार की अथक कोशिश, प्रशासन का सहयोग, ग्रामीणों की एकजुटता और समाज की संवेदनशीलता ने अंततः एक बिछड़े मासूम को उसके अपनों से मिलाने का काम किया।