# SBI Data Leak: SBI के 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड की पहचान, नाम-पता और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी लीक होने की आशंका

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- Published: 2026-10-21T15:48:27+00:00
- Author: Md Asif Equbal

&nbsp;देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शामिल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI से जुड़ी एक बड़ी साइबर सुरक्षा घटना सामने आई है। बैंक ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि डार्क वेब पर उपलब्ध बड़ी संख्या में रिकॉर्ड की शुरुआती जांच के दौरान 3,897 ऐसे ग्राहक रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी यानी Personally Identifiable Information मौजूद थी। इस खबर के सामने आने के बाद SBI के करोड़ों ग्राहकों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह मामला सामने कैसे आया। SBI के मुताबिक, 16 अक्टूबर को बैंक को अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम यानी CERT-In की ओर से अलर्ट मिला था। इस अलर्ट में SBI के ग्राहकों से जुड़े डेटा के डार्क वेब पर उपलब्ध होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद बैंक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने साइबर इन्सिडेंट रिस्पॉन्स और कंटेनमेंट प्रोटोकॉल को सक्रिय किया। इसके बाद बैंक ने डार्क वेब पर मौजूद करीब 3 लाख 75 हजार रिकॉर्ड की प्रारंभिक जांच की। इस जांच में 3,897 रिकॉर्ड ऐसे पाए गए जिनमें ग्राहकों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी मौजूद थी। हालांकि, SBI ने यह भी साफ किया है कि अभी विस्तृत जांच बाकी है और फिलहाल यह पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है कि डार्क वेब पर मौजूद प्रत्येक जानकारी वास्तविक और पूर्ण है या नहीं। बैंक अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि डेटा आखिर किस स्रोत से बाहर गया और इस घटना की वास्तविक सीमा कितनी है। अब सवाल यह है कि इन 3,897 रिकॉर्ड में आखिर किस तरह की जानकारी मौजूद थी। शुरुआती जांच के अनुसार, संभावित रूप से प्रभावित डेटा में ग्राहकों के नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, लिंग, ईमेल आईडी और आवासीय पता शामिल हैं। इसके अलावा कुछ रिकॉर्ड में ब्रांच से जुड़े पहचानकर्ता, Customer Information File यानी CIF से संबंधित जानकारी, Lead ID और लोन या लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा भी शामिल होने की बात सामने आई है। यहां यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर SBI ने यह नहीं कहा है कि ग्राहकों के बैंक खातों से पैसा चोरी हुआ है या बैंकिंग बैलेंस में कोई गड़बड़ी हुई है। SBI ने कहा है कि इस घटना का बैंक के मुख्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन या Business Continuity पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है और बैंक की मुख्य सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। लेकिन व्यक्तिगत जानकारी का डार्क वेब तक पहुंचना अपने आप में गंभीर साइबर सुरक्षा चिंता है। किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, पता, जन्मतिथि या बैंकिंग से जुड़ी पहचान संबंधी जानकारी यदि गलत हाथों में पहुंचती है, तो इसका इस्तेमाल आगे चलकर फर्जी कॉल, फर्जी मैसेज, फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग जैसे साइबर अपराधों में किया जा सकता है। इसलिए इस घटना को केवल इस आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि बैंक का मुख्य कारोबार प्रभावित नहीं हुआ है। SBI ने मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को भी नियुक्त किया है। यह एजेंसी CERT-In से empanelled यानी सूचीबद्ध एजेंसी है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि वास्तव में कितना डेटा प्रभावित हुआ, डेटा की प्रामाणिकता क्या है, संभावित स्रोत क्या था और ग्राहकों तथा बैंक के लिए इससे जुड़े जोखिम कितने बड़े हैं। बैंक ने यह भी कहा है कि वह जरूरी सुधारात्मक और रोकथाम संबंधी कदम उठा रहा है। इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी इसे अंतिम रूप से किसी खास सिस्टम या सर्वर से हुई डेटा चोरी के रूप में निष्कर्षित करना जल्दबाजी होगी। SBI की प्रारंभिक जांच में डार्क वेब पर मौजूद रिकॉर्ड में उसके ग्राहकों से संबंधित जानकारी मिलने की बात सामने आई है, लेकिन डेटा का मूल स्रोत और उसके बाहर जाने का पूरा तरीका विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। डार्क वेब का नाम सामने आने के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि डार्क वेब आखिर होता क्या है। सामान्य इंटरनेट के अलावा इंटरनेट का एक ऐसा हिस्सा भी है, जिसे सामान्य सर्च इंजन आसानी से इंडेक्स नहीं करते। साइबर अपराधियों द्वारा चोरी किए गए या अवैध रूप से साझा किए गए डेटा की खरीद-फरोख्त या चर्चा के लिए ऐसे नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, केवल किसी डेटा के डार्क वेब पर दिखाई देने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि बैंक के पूरे सिस्टम को हैक कर लिया गया था। SBI की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, फिलहाल बैंक की मुख्य बैंकिंग सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं। इसका मतलब यह है कि ग्राहक सामान्य बैंकिंग गतिविधियां जारी रख सकते हैं। लेकिन जिन लोगों को अनजान नंबरों से बैंक अधिकारी बनकर कॉल आए, उनसे व्यक्तिगत जानकारी, OTP, PIN, पासवर्ड या किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाए, उन्हें बेहद सावधान रहना चाहिए। &nbsp;बैंक द्वारा जारी किया गया अधिकारिक notice👆🏻​ खास तौर पर अगर कोई व्यक्ति फोन करके कहता है कि आपके SBI खाते से जुड़ी जानकारी लीक हो गई है और उसे ठीक करने के लिए OTP बताना होगा, कोई ऐप इंस्टॉल करना होगा या किसी लिंक पर जाकर बैंकिंग जानकारी दर्ज करनी होगी, तो ऐसे दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में ग्राहक को बैंक के आधिकारिक माध्यमों से ही संपर्क करना चाहिए। फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि SBI ने इस घटना को स्वीकार करते हुए जांच शुरू कर दी है, लेकिन डेटा लीक की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड की पहचान शुरुआती जांच में हुई है और करीब 3 लाख 75 हजार रिकॉर्ड की समीक्षा की गई है। अब स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी की जांच से यह स्पष्ट होगा कि डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों पर वास्तविक असर पड़ा और इस घटना के पीछे की पूरी वजह क्या है। यानी फिलहाल SBI ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी संदेश है—घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। बैंकिंग से जुड़ी किसी भी संदिग्ध कॉल, SMS, ईमेल या मैसेज को नजरअंदाज करें और अपनी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। जैसे-जैसे SBI की विस्तृत जांच आगे बढ़ेगी, डेटा लीक की वास्तविक प्रकृति और इसके संभावित प्रभाव को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल बैंक का कहना है कि उसकी मुख्य सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं और घटना की विस्तृत जांच के साथ जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
